लखनऊ, 29 अगस्त। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर प्रदेश के लोगों को सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने आशंका जताई कि विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर SIR कराया जा सकता है और इसके जरिए नई मतदाता सूची तैयार की जा सकती है।
लखनऊ स्थित सपा मुख्यालय में शनिवार को आयोजित संवाददाता सम्मेलन में अखिलेश यादव ने कहा कि प्रदेश की जनता को चुनाव से पहले होने वाली किसी भी नई SIR प्रक्रिया को लेकर सावधान रहना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा SIR के दौरान कई तरह की समस्याएं सामने आई हैं और आशंका है कि चुनाव के समय दोबारा पुनरीक्षण कराकर मतदाता सूची में बदलाव किया जा सकता है।
अखिलेश यादव ने कहा कि निर्वाचन आयोग की ओर से कुछ महीने पहले उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण कराया गया था। इस प्रक्रिया का उद्देश्य पात्र मतदाताओं की पहचान करना तथा अपात्र और दोहराव वाले नामों को हटाना था। हालांकि, सपा प्रमुख पहले भी इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते रहे हैं। उनका कहना है कि पुनरीक्षण के दौरान वास्तविक और पात्र मतदाताओं के नाम भी सूची से हटाए जाने की आशंका है।
महंगाई और कानून-व्यवस्था पर सरकार को घेरा
सपा अध्यक्ष ने भाजपा सरकार पर महंगाई, कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक संपत्तियों के मुद्दे को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि आम आदमी के सामने जरूरी वस्तुओं और ईंधन की बढ़ती कीमतें बड़ी चुनौती बनी हुई हैं, जबकि लोगों की आय उसी अनुपात में नहीं बढ़ी है।
उन्होंने कहा कि यदि प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है तो समाजवादी चिंतक डॉ. राममनोहर लोहिया के ‘दाम बांधो’ सिद्धांत को लागू करने की दिशा में काम किया जाएगा। उनका कहना था कि बढ़ती महंगाई के बीच आम लोगों को राहत देना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।
रक्षाबंधन पर मुफ्त बस यात्रा की व्यवस्था पर सवाल
अखिलेश यादव ने रक्षाबंधन के अवसर पर महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा की व्यवस्था को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश के कई हिस्सों से इस दौरान अव्यवस्था की तस्वीरें सामने आई हैं। उन्होंने सरकार से सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने और यात्रियों को सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की।
जेपीएनआईसी और सार्वजनिक संपत्तियों का मुद्दा उठाया
सपा प्रमुख ने लखनऊ स्थित जयप्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय केंद्र (जेपीएनआईसी) का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह स्थान समाजवादियों के लिए भावनात्मक रूप से महत्वपूर्ण है। अखिलेश ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में कई सार्वजनिक संपत्तियों को बेचने की प्रक्रिया आगे बढ़ी है।
उन्होंने कहा कि सार्वजनिक संपत्तियां केवल आर्थिक संसाधन नहीं हैं, बल्कि उनका सामाजिक और ऐतिहासिक महत्व भी है। इन संपत्तियों की सुरक्षा और संरक्षण सरकार की जिम्मेदारी है।
संविधान की रक्षा को बताया जिम्मेदारी
अखिलेश यादव ने संविधान को लेकर भी भाजपा सरकार पर निशाना साधा। डॉ. भीमराव आंबेडकर का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि संविधान ने देश के नागरिकों को सम्मान और अधिकार दिए हैं। उन्होंने कहा कि संविधान की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।
‘पीडीए’ को नया अर्थ देने की कोशिश
सपा अध्यक्ष ने अपनी पार्टी के चर्चित ‘पीडीए’ नारे को नया विस्तार देते हुए कहा कि इसका अर्थ ‘पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक’ होने के साथ-साथ ‘प्रोटेस्ट, डिमॉन्स्ट्रेशन और एक्टिविस्ट्स’ भी है।
उन्होंने कहा कि पीडीए समर्थकों को धैर्य और अनुशासन के साथ सकारात्मक प्रयास जारी रखना चाहिए। अखिलेश यादव ने दावा किया कि यदि पीडीए के समर्थक इसी तरह संगठित होकर प्रयास करते रहे तो प्रदेश में पीडीए की सरकार बनने से कोई नहीं रोक सकता।




