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राम मंदिर ट्रस्ट के पहले सीईओ बने सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा

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अयोध्या, 02 सितम्बर। अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी को लेकर चल रहे विवाद के बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने महत्वपूर्ण प्रशासनिक फैसला लिया है। ट्रस्ट ने भारतीय वायुसेना के सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को अपना पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) नियुक्त किया है। सैन्य क्षेत्र में करीब चार दशक का लंबा अनुभव रखने वाले मिश्रा अब राम मंदिर की दैनिक प्रशासनिक व्यवस्था, श्रद्धालुओं को उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं तथा विभिन्न सरकारी और गैर-सरकारी एजेंसियों के बीच समन्वय की जिम्मेदारी संभालेंगे।

        सीईओ की नियुक्ति के लिए गठित चयन समिति ने ट्रस्ट को तीन नामों का पैनल सौंपा था। इसमें उत्तर प्रदेश पुलिस के पूर्व आईपीएस अधिकारी राजेश पांडेय, बिहार के पूर्व डीजीपी डॉ. परेश सक्सेना और पूर्व आईएएस अधिकारी दिनेश चंद्र के नाम शामिल थे। ट्रस्ट की बैठक में विस्तृत विचार-विमर्श के बाद जितेंद्र मिश्रा के नाम पर सहमति बनी और उन्हें इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए चुना गया।

       ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन ने बैठक में लिए गए निर्णय की जानकारी देते हुए बताया कि सीईओ पद के लिए कुल 5,585 आवेदन प्राप्त हुए थे। इन आवेदनों की प्रक्रिया के बाद तीन उम्मीदवारों का चयन कर अंतिम पैनल तैयार किया गया था। इसी पैनल में शामिल जितेंद्र मिश्रा को ट्रस्ट का पहला सीईओ नियुक्त किया गया है।

       सीईओ की नियुक्ति के साथ ही ट्रस्ट ने अपने विस्तार से जुड़ा एक अन्य महत्वपूर्ण फैसला भी लिया है। बैठक में अयोध्या के मदन मोहन पांडेय, दिल्ली के महेश भागचंदका और शिकोहाबाद की डॉ. निर्मला यादव को ट्रस्ट में नए ट्रस्टी के रूप में शामिल करने का निर्णय लिया गया।

चार दशक का सैन्य अनुभव अब राम मंदिर की व्यवस्था में आएगा काम

       उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के निवासी जितेंद्र मिश्रा का भारतीय वायुसेना में लंबा और महत्वपूर्ण करियर रहा है। उन्होंने छह दिसंबर 1986 को फाइटर पायलट के रूप में भारतीय वायुसेना में कमीशन प्राप्त किया था। लगभग चार दशक के सैन्य सेवाकाल में उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर जिम्मेदारी निभाई।

       मिश्रा ने अपने करियर के दौरान विभिन्न श्रेणियों के 18 से अधिक विमानों पर उड़ान भरी और तीन हजार घंटे से ज्यादा का उड़ान अनुभव हासिल किया। सैन्य सेवा के दौरान संचालन, रणनीतिक योजना, नेतृत्व और बड़े स्तर पर प्रशासनिक प्रबंधन से जुड़े कार्यों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

      वह भारतीय वायुसेना की पश्चिमी वायु कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ भी रह चुके हैं। इसके अलावा एकीकृत रक्षा स्टाफ में उप प्रमुख (सिद्धांत, संगठन एवं प्रशिक्षण) जैसे महत्वपूर्ण पद पर भी उन्होंने सेवाएं दी हैं। उनके अनुभव में विभिन्न सुरक्षा एवं प्रशासनिक एजेंसियों के बीच समन्वय तथा बड़े संगठनों के संचालन से जुड़े कार्य शामिल रहे हैं।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान संभाली थी पश्चिमी वायुसेना कमान

      जितेंद्र मिश्रा को हाल के सैन्य अभियानों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिली हैं। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पश्चिमी वायुसेना कमान का नेतृत्व किया था। इस जिम्मेदारी ने उनके परिचालन और रणनीतिक नेतृत्व के अनुभव को और महत्वपूर्ण बनाया।

      अब सैन्य क्षेत्र में हासिल उनका यही अनुभव अयोध्या में राम मंदिर की विशाल और लगातार बढ़ती प्रशासनिक जरूरतों को संभालने में उपयोगी साबित होने की उम्मीद है। राम मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने के कारण सुरक्षा, दर्शन व्यवस्था, भीड़ प्रबंधन, स्वच्छता, सुविधाओं और विभिन्न विभागों के बीच तालमेल जैसी व्यवस्थाएं लगातार चुनौतीपूर्ण बनी रहती हैं।

श्रद्धालु सुविधाओं और समन्वय पर रहेगा जोर

     सीईओ के रूप में जितेंद्र मिश्रा की जिम्मेदारी केवल मंदिर के आंतरिक प्रशासन तक सीमित नहीं होगी। राम मंदिर परिसर और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं में कई सरकारी विभागों, सुरक्षा एजेंसियों तथा स्थानीय प्रशासन की भूमिका रहती है। ऐसे में विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना सीईओ की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल होगा।

चढ़ावे से जुड़े विवाद के बीच अहम नियुक्ति

     जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले दान और अन्य सामग्री से संबंधित कथित चोरी के मामले को लेकर विवाद सामने आया है। ऐसे माहौल में ट्रस्ट द्वारा अनुभवी अधिकारी को सीईओ की जिम्मेदारी सौंपना प्रशासनिक पारदर्शिता और व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

     ट्रस्ट के सामने मंदिर की धार्मिक गरिमा बनाए रखने के साथ-साथ आधुनिक प्रशासनिक मानकों के अनुरूप व्यवस्थाओं को संचालित करने की चुनौती भी है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या, मंदिर से जुड़े विभिन्न निर्माण एवं विकास कार्य और अयोध्या के तेजी से विकसित हो रहे धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में उभरने के कारण प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी बढ़ रही हैं।