रायपुर, 02 सितम्बर। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने भाजपा सरकार के बस्तर विकास मॉडल पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बस्तर और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में ‘विकास और सुरक्षा’ के बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवार मुआवजे के लिए भटक रहे हैं और मुख्यधारा में लौट चुके पूर्व नक्सलियों को भी पुनर्वास योजनाओं का अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा है।
श्री बैज ने कहा कि हाल ही में महाराष्ट्र के गढ़चिरौली से मुख्यधारा में लौटे 50 से अधिक पूर्व नक्सलियों को उनके गृह क्षेत्र बस्तर भेजा गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार यह स्पष्ट करे कि इन लोगों को पुनर्वास नीति के तहत किए गए वादों का कितना लाभ मिला है। कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों और सरेंडर कर चुके लोगों की समस्याओं के समाधान के बजाय सरकार उनके नाम पर केवल प्रचार कर रही है।
उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा वर्ष 2025 में बस्तर पंडुम के दौरान जगदलपुर में की गई उस घोषणा का भी उल्लेख किया, जिसमें ‘नक्सल मुक्त गांव’ घोषित किए जाने वाले प्रत्येक गांव को विकास कार्यों के लिए अलग से एक करोड़ रुपये देने की बात कही गई थी। बैज का आरोप है कि यह घोषणा अब तक जमीन पर दिखाई नहीं दी है और किसी भी गांव को यह राशि जारी नहीं की गई।
आदिवासियों पर कार्रवाई और पुनर्वास को लेकर सवाल
दीपक बैज ने आरोप लगाया कि प्राकृतिक संसाधनों की लूट का विरोध करने वाले निर्दोष आदिवासियों को नक्सली सहयोगी बताकर जेलों में बंद किया गया। उन्होंने कहा कि जब गंभीर आरोपों का सामना कर रहे नक्सलियों को आत्मसमर्पण के बाद मुख्यधारा में लौटने का अवसर दिया जा रहा है, तो उन हजारों आदिवासियों की रिहाई क्यों नहीं की जा रही, जिन पर नक्सलियों का सहयोगी होने का आरोप है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने बस्तर में ‘विश्वास, विकास और सुरक्षा’ की नीति के तहत काम करने का दावा किया था। उनके अनुसार, निर्दोष आदिवासियों की रिहाई के लिए जस्टिस पटनायक समिति का गठन किया गया था। साथ ही वनोपज की कीमत और संग्रहण की मात्रा बढ़ाकर आदिवासी परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने तथा बस्तर के प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा की दिशा में कदम उठाए गए थे।
जल-जंगल-जमीन को लेकर भाजपा सरकार पर आरोप
बैज ने भाजपा सरकार पर बस्तर के प्राकृतिक संसाधनों को उद्योगपतियों के हित में इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता बस्तर में स्थायी शांति स्थापित करने के बजाय क्षेत्र के जल, जंगल और जमीन को कॉरपोरेट घरानों के हवाले करना है।
उन्होंने नंदराज पर्वत ग्रामसभा की कथित फर्जी एनओसी, बैलाडीला, बचेली और किरंदुल की खदानों, कांकेर के हाहालदी क्षेत्र तथा बीजापुर और नारायणपुर के जंगलों का उल्लेख करते हुए सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। बैज ने आरोप लगाया कि शबरी, डंकनी-शंखनी और इंद्रावती जैसी नदियों तथा बस्तर के खनिज संसाधनों का इस्तेमाल भी कुछ उद्योगपतियों के हितों को साधने के लिए किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों के दोहन का सबसे ज्यादा असर स्थानीय आदिवासी समुदाय पर पड़ रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष के मुताबिक, विकास के नाम पर यदि स्थानीय लोगों की जमीन, जंगल और पारंपरिक संसाधनों पर उनका अधिकार कमजोर होता है, तो ऐसे विकास मॉडल पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
दीपक बैज ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के लिए विकास का अर्थ आम लोगों के जीवन स्तर में सुधार के बजाय बड़े कॉरपोरेट घरानों के मुनाफे को बढ़ाना रह गया है। उन्होंने कहा कि इसके लिए पर्यावरण, प्रकृति और स्थानीय आदिवासी समाज के भविष्य को दांव पर लगाया जा रहा है।




