रायपुर, 2 सितंबर। बारिश के पानी को सहेजने और भू-जल पुनर्भरण के प्रयासों में छत्तीसगढ़ ने देश में पहला स्थान हासिल किया है। जल शक्ति मंत्रालय के ‘जल संचय जन भागीदारी’ (JSJB) अभियान के तीसरे चरण में राज्य को यह उपलब्धि मिली है। छत्तीसगढ़ के पांच जिले भी जल संरक्षण के क्षेत्र में देश के शीर्ष 10 जिलों में शामिल हुए हैं।
नई दिल्ली के सुषमा स्वराज भवन में आयोजित जल शक्ति मंत्रालय के विभागीय शिखर सम्मेलन में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राज्य में जल संरक्षण के लिए किए जा रहे नवाचारों और जनभागीदारी आधारित प्रयासों की जानकारी साझा की। सम्मेलन के ‘कैच द रेन’ सत्र में उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने वर्षा जल संचयन, भू-जल पुनर्भरण और पेयजल स्रोतों के संरक्षण के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। सम्मेलन में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल सहित विभिन्न राज्यों के मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
जल संरक्षण को जनअभियान बनाने पर जोर
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण को केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि किसानों, ग्राम पंचायतों, जल सखियों, जल मित्रों और स्थानीय समुदायों को जोड़कर इसे जनअभियान का स्वरूप दिया गया है।
उन्होंने कहा कि किसान के लिए पानी फसल, आजीविका और भविष्य से जुड़ा विषय है। इसलिए राज्य में जल संरक्षण के प्रयासों के केंद्र में गांव और किसान को रखा गया है।
कोरिया का ‘5 प्रतिशत मॉडल’ बना मिसाल
मुख्यमंत्री ने कोरिया जिले से शुरू हुए ‘5 प्रतिशत मॉडल’ का भी उल्लेख किया। इसके तहत किसान अपनी कृषि भूमि का करीब पांच प्रतिशत हिस्सा वर्षा जल संचयन और भू-जल पुनर्भरण के लिए स्वेच्छा से उपलब्ध करा रहे हैं।इस भूमि पर ऐसी जल संरचनाएं विकसित की जा रही हैं, जिससे बारिश का पानी खेत से बाहर बहने के बजाय वहीं रुक सके और धीरे-धीरे जमीन में समाहित हो। इस मॉडल में किसान केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि जल संरक्षण अभियान के सक्रिय भागीदार हैं।
जल संरचनाओं की जियो-टैगिंग, नियमित निगरानी और प्रगति की समीक्षा के साथ पंचायतों, किसानों और स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। इससे भू-जल स्तर सुधारने और सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
JSJB के तीसरे चरण में पहला स्थान
‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान के पहले चरण में छत्तीसगढ़ में 4 लाख 5 हजार 561 जल संरचनाएं बनाई गईं और राज्य देश में दूसरे स्थान पर रहा।दूसरे चरण में 24 लाख 7 हजार 456 जल संरचनाएं दर्ज की गईं, जिनमें से 23 लाख 7 हजार 768 का काम पूरा हो चुका है। इस चरण में भी छत्तीसगढ़ दूसरे स्थान पर रहा।
अब तीसरे चरण यानी JSJB 3.0 में 79 हजार 775 जल संरचनाएं दर्ज की गई हैं। इनमें से 77 हजार 719 संरचनाओं का काम पूरा हो चुका है। इसी के साथ छत्तीसगढ़ ने इस चरण में देश में पहला स्थान हासिल किया है।
पांच जिले देश के टॉप-10 में
राज्य की उपलब्धि के साथ छत्तीसगढ़ के सूरजपुर, महासमुंद, बालोद, बलौदाबाजार-भाटापारा और कबीरधाम जिले भी जल संरक्षण के क्षेत्र में देश के शीर्ष 10 जिलों में शामिल हुए हैं।
इन जिलों में गांव और पंचायत स्तर पर वर्षा जल संचयन, भू-जल पुनर्भरण तथा जल स्रोतों के संरक्षण के कार्य स्थानीय समुदायों की भागीदारी से किए जा रहे हैं।
पानी की कमी वाले ब्लॉक 26 से घटकर 19
राज्य में जल संरक्षण के प्रयासों के बीच पानी की कमी वाले ब्लॉकों की संख्या 26 से घटकर 19 रह गई है। इसके अलावा पांच क्रिटिकल ब्लॉकों के सामान्य श्रेणी में आने का अनुमान है।
राज्य सरकार का जोर जल संचयन संरचनाओं के निर्माण के साथ पुराने जल स्रोतों के संरक्षण, भू-जल पुनर्भरण, जल संरचनाओं की मैपिंग और नियमित निगरानी पर है।
छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘कैच द रेन—जहां जल गिरे, वहीं सहेजें’ के संदेश को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार लागू किया जा रहा है। लक्ष्य है कि बारिश के अधिकतम पानी को गांव और खेत की सीमा में रोककर उसका उपयोग सिंचाई, पेयजल और अन्य स्थानीय जरूरतों के लिए किया जा सके।




