रायपुर/नई दिल्ली, 9 सितंबर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने रेलवे मंत्रालय की तीन मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं पर कुल 10,783 करोड़ रुपये खर्च होंगे और इन्हें वर्ष 2029-30 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
मंजूर की गई परियोजनाओं में खड़गपुर-ज्हारसुगुड़ा (बागदेही) चौथी लाइन, कटनी-पेंड्रा रोड चौथी लाइन और बिलासपुर (उसलापुर)-पेंड्रा रोड तीसरी लाइन शामिल हैं। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में करीब 656 किलोमीटर की वृद्धि होगी।
इन तीनों परियोजनाओं का लाभ पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के कुल 14 जिलों को मिलेगा। रेलवे के अनुसार, प्रस्तावित मल्टी-ट्रैकिंग से करीब 4,790 गांवों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिलेगी। इन क्षेत्रों में लगभग 56 लाख की आबादी रहती है।
छत्तीसगढ़ को भी मिलेगा बड़ा लाभ
परियोजनाओं में शामिल कटनी-पेंड्रा रोड चौथी लाइन और बिलासपुर (उसलापुर)-पेंड्रा रोड तीसरी लाइन छत्तीसगढ़ के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। इनसे बिलासपुर और पेंड्रा रोड क्षेत्र में रेल यातायात की क्षमता बढ़ेगी तथा यात्री और मालगाड़ियों के संचालन में सुविधा होगी।
रेलवे के अनुसार, मल्टी-ट्रैकिंग से व्यस्त रेल मार्गों पर ट्रेनों की आवाजाही को अधिक सुचारु बनाने में मदद मिलेगी। इससे ट्रेनों के संचालन की दक्षता बढ़ने के साथ ही सेवा की विश्वसनीयता में भी सुधार होगा। अतिरिक्त रेल लाइनें बनने से मौजूदा मार्गों पर भीड़ और परिचालन संबंधी दबाव कम होगा।
27 मिलियन टन सालाना अतिरिक्त माल ढुलाई
ये रेल मार्ग कोयला, सीमेंट, लौह एवं इस्पात सहित विभिन्न महत्वपूर्ण वस्तुओं की ढुलाई के लिए अहम हैं। परियोजनाओं की क्षमता बढ़ने से रेलवे को करीब 27 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) अतिरिक्त माल ढुलाई की उम्मीद है।
इससे उद्योगों के लिए कच्चे माल और तैयार उत्पादों के परिवहन को गति मिलेगी तथा देश में लॉजिस्टिक्स की लागत कम करने में मदद मिलेगी। रेलवे के मुताबिक, बेहतर रेल कनेक्टिविटी से सड़क परिवहन पर दबाव भी कम किया जा सकेगा।
पर्यटन को भी मिलेगा बढ़ावा
नई रेल लाइन परियोजनाओं का लाभ केवल औद्योगिक और माल परिवहन क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पर्यटन को भी इससे गति मिलने की उम्मीद है। परियोजनाओं से जुड़े क्षेत्रों में कई प्रमुख धार्मिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थल स्थित हैं।
इनमें तरातारिणी मंदिर, श्री क्षेत्र जगन्नाथ मंदिर, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, विराटेश्वर मंदिर, अमरकंटक मंदिर, ज्वालेश्वर धाम, अचानकमार टाइगर रिजर्व, खुटाघाट बांध, मल्हार पुरातात्विक स्थल और रतनपुर महामाया मंदिर जैसे प्रमुख स्थल शामिल हैं।
बेहतर रेल सुविधा से इन पर्यटन स्थलों तक लोगों की पहुंच आसान होगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार तथा स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है।
पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान
रेलवे ने इन परियोजनाओं को पर्यावरण की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बताया है। रेल परिवहन को सड़क परिवहन की तुलना में अधिक ऊर्जा-कुशल और पर्यावरण अनुकूल माध्यम माना जाता है। रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ने से माल परिवहन के लिए सड़क पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
रेलवे के अनुमान के अनुसार, इन परियोजनाओं से करीब 12 करोड़ लीटर तेल के आयात में कमी लाने और लगभग 62 करोड़ किलोग्राम CO₂ उत्सर्जन घटाने में मदद मिल सकती है। रेलवे ने इसे लगभग 2.48 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर पर्यावरणीय लाभ के रूप में आंका है।
पीएम गति शक्ति योजना के अनुरूप परियोजनाएं
इन परियोजनाओं की योजना पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अनुरूप तैयार की गई है। इसका उद्देश्य विभिन्न परिवहन माध्यमों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित कर मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स दक्षता को बढ़ाना है।
परियोजनाओं की योजना बनाते समय एकीकृत ढंग से विभिन्न हितधारकों से विचार-विमर्श किया गया है। इससे लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की आवाजाही के लिए अधिक सुगम और प्रभावी परिवहन व्यवस्था विकसित करने में मदद मिलेगी।
केंद्र सरकार के अनुसार, इन रेल परियोजनाओं से संबंधित क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। बेहतर कनेक्टिविटी से उद्योगों, व्यापार, पर्यटन और स्थानीय बाजारों को लाभ मिलने के साथ रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
रेलवे के बुनियादी ढांचे के विस्तार की यह पहल ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब देश में बढ़ती यात्री और माल परिवहन जरूरतों को पूरा करने के लिए रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। तीनों मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं के निर्धारित समयसीमा में पूरा होने पर पूर्वी और मध्य भारत के बीच रेल संपर्क और परिवहन व्यवस्था को नई गति मिलने की उम्मीद है।




