- अशोक कुमार साहू
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई अब केवल विज्ञान और तकनीक की दुनिया का विषय नहीं रह गया है। यह अर्थव्यवस्था, शिक्षा, रोजगार, प्रशासन और सामाजिक जीवन को बदलने वाली ऐसी शक्ति बन चुका है, जो आने वाले वर्षों में राज्यों के विकास की दिशा और उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता तय करेगी। इस बदलती वैश्विक तस्वीर के बीच छत्तीसगढ़ ने एआई को अपने विकास के अगले चरण का महत्वपूर्ण आधार बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 21 अगस्त को नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय वर्ल्ड लीडर्स फोरम में वैश्विक आर्थिक जगत की प्रमुख हस्तियों के समक्ष छत्तीसगढ़ की बदलती आर्थिक तस्वीर और निवेश की संभावनाओं का जो रोडमैप प्रस्तुत किया, उसमें एआई को विशेष महत्व दिया गया। यह संकेत है कि छत्तीसगढ़ अब अपनी पारंपरिक खनिज और औद्योगिक पहचान से आगे निकलकर ज्ञान, तकनीक, नवाचार और युवा प्रतिभा आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ना चाहता है।
छत्तीसगढ़ के लिए यह परिवर्तन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य की अर्थव्यवस्था लंबे समय से खनिज संपदा और पारंपरिक उद्योगों पर आधारित रही है। यह आधार भविष्य में भी महत्वपूर्ण रहेगा, लेकिन बदलती दुनिया में केवल प्राकृतिक संसाधनों के भरोसे आर्थिक प्रगति को स्थायी गति देना संभव नहीं होगा। नई अर्थव्यवस्था में जिस राज्य के पास प्रशिक्षित मानव संसाधन, डिजिटल बुनियादी ढांचा, नवाचार की क्षमता और तकनीकी उद्यमिता होगी, वही निवेश और रोजगार के नए अवसरों को आकर्षित कर सकेगा। ऐसे में एआई मिशन को छत्तीसगढ़ के आर्थिक रूपांतरण की व्यापक रणनीति के हिस्से के रूप में देखना अधिक उचित होगा।
राज्य सरकार ने पांच वर्षों के लिए 500 करोड़ रुपये के छत्तीसगढ़ स्टेट आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मिशन को मंजूरी दी है। इस मिशन का उद्देश्य केवल सरकारी विभागों में नई तकनीक का इस्तेमाल करना नहीं, बल्कि प्रदेश में एआई का व्यापक इकोसिस्टम तैयार करना है। इसके तहत छह लाख विद्यार्थियों और डेढ़ लाख शासकीय कर्मचारियों सहित कुल 7.5 लाख लोगों को एआई तथा उससे संबंधित तकनीकों का प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है। यह संख्या अपने आप में बताती है कि सरकार एआई को किसी सीमित तकनीकी परियोजना के रूप में नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर मानव संसाधन विकास के अभियान के रूप में देख रही है।
इस पहल की सबसे बड़ी ताकत यही हो सकती है कि एआई की चर्चा केवल बड़े शहरों, आईटी कंपनियों और तकनीकी संस्थानों तक सीमित न रहे। छत्तीसगढ़ के गांवों, कस्बों और छोटे शहरों के विद्यार्थी भी यदि एआई, मशीन लर्निंग, डेटा एनालिटिक्स और रोबोटिक्स जैसी तकनीकों से परिचित होंगे तो राज्य को भविष्य के रोजगार बाजार में एक बड़ा स्थानीय प्रतिभा समूह मिल सकता है। स्कूलों में एआई जागरूकता कार्यक्रम, एआई एवं रोबोटिक्स क्लब, हैकाथॉन, महाविद्यालयों में सर्टिफिकेशन कार्यक्रम और छात्र परियोजनाओं के लिए अनुदान जैसी योजनाएं इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकती हैं। आईटीआई में एआई लैब और विश्वविद्यालयों में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने की योजना शिक्षा और उद्योग के बीच नई कड़ी बनाने में सहायक हो सकती है।
हालांकि, एआई प्रशिक्षण की सफलता केवल प्रशिक्षित लोगों की संख्या से तय नहीं होगी। असली कसौटी यह होगी कि प्रशिक्षण के बाद कितने युवाओं को रोजगार, फ्रीलांसिंग, स्टार्टअप और स्थानीय उद्यमिता के अवसर मिलते हैं। यदि एआई कौशल को बाजार की वास्तविक जरूरतों से जोड़ा गया, स्थानीय उद्योगों की समस्याओं के समाधान के लिए युवाओं को प्रोत्साहित किया गया और उन्हें पूंजी, मार्गदर्शन तथा बाजार उपलब्ध कराया गया, तभी यह मिशन रोजगार सृजन का प्रभावी माध्यम बन सकेगा।
इसी दृष्टि से 300 से अधिक एआई स्टार्टअप्स को सहयोग देने का लक्ष्य उल्लेखनीय है। छत्तीसगढ़ में यदि स्थानीय समस्याओं पर आधारित तकनीकी समाधान विकसित होते हैं तो इससे एक नई उद्यमिता संस्कृति पैदा हो सकती है। कृषि, वन, खनन, स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवहन, पर्यटन और स्थानीय प्रशासन जैसे क्षेत्रों में एआई के प्रयोग की व्यापक संभावनाएं हैं। प्रदेश की विशिष्ट भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियां भी तकनीकी नवाचार के लिए अनेक अवसर उपलब्ध कराती हैं। स्टार्टअप्स को सीड फंडिंग, क्लाउड कंप्यूटिंग, डेटा सेट, शोध परियोजनाओं और उद्योग-शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से जोड़ना इस इकोसिस्टम को मजबूत कर सकता है।
नवा रायपुर में लगभग 1,000 करोड़ रुपये की लागत से एआई डेटा सेंटर पार्क विकसित करने की योजना इस पूरी रणनीति का दूसरा महत्वपूर्ण पक्ष है। एआई आधारित अर्थव्यवस्था केवल प्रशिक्षित मानव संसाधन से नहीं बनती। इसके लिए डेटा सेंटर, क्लाउड कंप्यूटिंग, तेज इंटरनेट, सुरक्षित डेटा प्रबंधन और पर्याप्त डिजिटल कनेक्टिविटी जैसी आधारभूत सुविधाएं भी जरूरी हैं। यदि नवा रायपुर को एआई और डिजिटल सेवाओं के केंद्र के रूप में विकसित किया जा सका तो इससे निवेश आकर्षित करने के साथ-साथ तकनीकी कंपनियों और नई पीढ़ी के रोजगार के लिए भी अनुकूल वातावरण तैयार हो सकता है।
सरकार ने 50 से अधिक एआई आधारित सरकारी सेवाएं विकसित करने का लक्ष्य भी रखा है। यह पहल सीधे आम नागरिक के जीवन को प्रभावित कर सकती है। एआई का उपयोग यदि सरकारी योजनाओं की निगरानी, शिकायतों के विश्लेषण, दस्तावेजों की प्रक्रिया, डेटा आधारित निर्णय और सेवाओं की त्वरित डिलीवरी में किया जाता है तो प्रशासन अधिक प्रभावी हो सकता है। नागरिकों को उनकी अपनी भाषा में डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए भाषिणी जैसे प्लेटफॉर्म का उपयोग इस परिवर्तन को और समावेशी बना सकता है। तकनीक का वास्तविक मूल्य तभी है जब वह नागरिक और शासन के बीच की दूरी कम करे।
लेकिन एआई आधारित शासन के साथ जिम्मेदारी भी उतनी ही बड़ी है। सरकारी सेवाओं में एआई का इस्तेमाल बढ़ने के साथ नागरिकों के डेटा की सुरक्षा, निजता और निर्णय प्रक्रिया की पारदर्शिता महत्वपूर्ण प्रश्न बनेंगे। राज्य में एआई नीति तैयार करने, डेटा सुरक्षा, तकनीकी ऑडिट और डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन कानून के अनुरूप व्यवस्थाएं विकसित करने की चर्चा इसलिए स्वागतयोग्य है। एआई को मानव निर्णय का विकल्प बनाने के बजाय निर्णय प्रक्रिया को अधिक सक्षम बनाने वाले उपकरण के रूप में इस्तेमाल करना आवश्यक होगा। खासकर कल्याणकारी योजनाओं और संवेदनशील प्रशासनिक मामलों में मानवीय निगरानी बनाए रखना जरूरी होगा।
मुख्यमंत्री द्वारा एआई को सुशासन, पारदर्शिता, दक्षता और जनसेवा से जोड़कर देखने की बात इसी व्यापक चुनौती की ओर संकेत करती है। विभिन्न विभागों में एआई आधारित निर्णय सहायता प्रणाली, विभागवार रोडमैप और एआई नोडल अधिकारियों की नियुक्ति जैसे प्रस्ताव तभी प्रभावी होंगे जब उनके साथ स्पष्ट जवाबदेही भी तय की जाए। केवल तकनीक स्थापित कर देने से प्रशासन स्मार्ट नहीं बनता; स्मार्ट प्रशासन वह है जो तकनीक के साथ मानवीय संवेदनशीलता और जवाबदेही को भी बनाए रखे।
छत्तीसगढ़ के सामने एक और बड़ी चुनौती डिजिटल विभाजन की है। यदि एआई का लाभ केवल शहरों और बेहतर डिजिटल सुविधाओं वाले वर्ग तक सीमित रह गया तो नई तकनीक विकास की असमानता को कम करने के बजाय बढ़ा सकती है। इसलिए मोबाइल नेटवर्क, इंटरनेट कनेक्टिविटी और डिजिटल साक्षरता का विस्तार एआई मिशन का अभिन्न हिस्सा होना चाहिए। विशेषकर ग्रामीण, आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों तथा युवाओं तक तकनीकी संसाधनों की समान पहुंच सुनिश्चित करना आवश्यक है।
छत्तीसगढ़ की एआई यात्रा को अंततः रोजगार और आय से जोड़ना होगा। मुख्यमंत्री ने वर्ल्ड लीडर्स फोरम में जिस नई अर्थव्यवस्था की बात की, उसमें युवा केवल नौकरी पाने वाले नहीं, बल्कि रोजगार पैदा करने वाले बनने की कल्पना है। यही सोच एआई मिशन की सफलता का आधार बन सकती है। यदि एक विद्यार्थी तकनीक सीखकर स्थानीय समस्या का समाधान तैयार करता है, यदि कोई युवा एआई आधारित स्टार्टअप शुरू करता है, यदि किसान को बेहतर कृषि सलाह मिलती है, यदि सरकारी सेवा के लिए नागरिक को कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते और यदि छोटे उद्योग एआई के माध्यम से अपनी उत्पादकता बढ़ाते हैं, तो तकनीकी परिवर्तन का वास्तविक अर्थ सामने आएगा।
छत्तीसगढ़ के लिए एआई इसलिए केवल भविष्य की तकनीक नहीं, बल्कि विकास की नई भाषा बनने की संभावना रखता है। 500 करोड़ रुपये का एआई मिशन, 100 एआई डेटा लैब, पांच सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, 300 से अधिक स्टार्टअप्स को सहयोग, 7.5 लाख लोगों का प्रशिक्षण, 50 से अधिक एआई आधारित सरकारी सेवाएं और नवा रायपुर में डेटा सेंटर पार्क जैसी योजनाएं मिलकर एक व्यापक दिशा प्रस्तुत करती हैं।
अब आवश्यकता इन महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को जमीन पर उतारने की है। योजनाओं की घोषणा से अधिक महत्वपूर्ण उनका प्रभावी क्रियान्वयन, पारदर्शी निगरानी और परिणामों का मूल्यांकन होगा। छत्तीसगढ़ के पास युवा आबादी, प्राकृतिक संसाधन और विकास की संभावनाओं के साथ अब तकनीकी परिवर्तन का अवसर भी है। यदि एआई को शिक्षा, कौशल, रोजगार, उद्यमिता, उद्योग और सुशासन के साथ सही ढंग से जोड़ा गया तो यह प्रदेश की आर्थिक पहचान को बदलने वाला माध्यम बन सकता है।
खनिज संपदा ने छत्तीसगढ़ को औद्योगिक पहचान दी है; अब ज्ञान और कृत्रिम बुद्धिमत्ता उसे नई आर्थिक पहचान दे सकती है। चुनौती यह सुनिश्चित करने की है कि इस नई तकनीकी यात्रा का लाभ केवल कुछ संस्थानों या कंपनियों तक सीमित न रहे, बल्कि गांव के विद्यार्थी, युवा उद्यमी, किसान, कर्मचारी और सामान्य नागरिक भी इसके सहभागी बनें। तभी छत्तीसगढ़ की एआई यात्रा वास्तव में नई अर्थव्यवस्था, नए अवसर और समावेशी विकास की यात्रा बन सकेगी।
सम्प्रति- लेखक अशोक कुमार साहू सेन्ट्रल ग्राउन्ड न्यूज(cgnews.in) के सम्पादक तथा संवाद समिति यूएनआई के छत्तीसगढ़ के पूर्व राज्य प्रमुख हैं।




