नई दिल्ली, 18 सितम्बर। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता संजय राउत ने निर्वाचन आयोग द्वारा तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर अंतरिम रोक लगाए जाने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि निर्वाचन आयोग दबाव में फैसले ले रहा है तो देश में लोकतंत्र खतरे में पड़ सकता है।
निर्वाचन आयोग ने ममता बनर्जी और अरूप रॉय के नेतृत्व वाले दोनों गुटों का पक्ष सुनने के बाद बृहस्पतिवार रात जारी अंतरिम आदेश में कहा कि मामले में ‘चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968’ के तहत ठोस निर्णय लिया जाना आवश्यक है।
आयोग के आदेश के अनुसार छह अक्टूबर को होने वाले उपचुनावों में अंतिम निर्णय होने तक किसी भी गुट को ‘अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस’ नाम या पार्टी के आरक्षित ‘पुष्प और तृण’ चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होगी।
श्री राउत ने पत्रकारों से कहा कि ममता बनर्जी ने पार्टी की स्थापना की और उसके उद्देश्य तय किए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस को विभाजित किया है। राउत ने कहा कि पार्टी में बगावत होने से पार्टी बागी गुट की नहीं हो जाती।
उन्होंने निर्वाचन आयोग के फैसले पर आपत्ति जताते हुए कहा कि आयोग को चुनाव चिह्न पर रोक नहीं लगानी चाहिए थी और बागी गुट को किसी अन्य चुनाव चिह्न के साथ चुनाव लड़ना चाहिए था।
निर्वाचन आयोग के इस अंतरिम आदेश की कई विपक्षी दलों ने आलोचना की है और तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी विवाद के बीच ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट का समर्थन किया है।




