नई दिल्ली, 24 सितंबर। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने पार्टी संगठन में व्यापक फेरबदल करते हुए विभिन्न राज्यों के लिए महासचिव (संगठन) और संयुक्त महासचिव (संगठन) की नियुक्तियां की हैं। इसके साथ ही कई राष्ट्रीय संयुक्त महासचिवों (संगठन) को अलग-अलग राज्यों में पार्टी के संगठनात्मक मामलों की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
भाजपा की विज्ञप्ति के अनुसार, राष्ट्रीय संयुक्त महासचिव (संगठन) शिवप्रकाश को आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और गोवा में पार्टी के संगठनात्मक मामलों का प्रभारी बनाया गया है। वहीं सौदान सिंह को बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में संगठनात्मक मामलों की जिम्मेदारी दी गई है।
राष्ट्रीय संगठक वी. सतीश को अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) मोर्चों के संगठनात्मक मामलों का प्रभार सौंपा गया है। इसके अलावा उन्हें भाजपा के संसद कार्यालय की जिम्मेदारी भी दी गई है।
पार्टी ने धर्मपाल को उत्तर प्रदेश में महासचिव (संगठन) नियुक्त किया है। महाराष्ट्र में अजय जामवाल को महासचिव (संगठन) की जिम्मेदारी दी गई है। पश्चिम बंगाल में अमिताभ चक्रवर्ती महासचिव (संगठन) के रूप में काम करेंगे, जबकि सतीश धोंड को महाराष्ट्र में संयुक्त महासचिव (संगठन) नियुक्त किया गया है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने पवन राणा को दिल्ली और हरियाणा के लिए महासचिव (संगठन) बनाया है। मधुकर को हैदराबाद, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना से जुड़े संगठनात्मक दायित्व सौंपे गए हैं।
भाजपा ने रवींद्र राजू को असम और त्रिपुरा, जबकि भिखूभाई दलसानिया को बिहार का महासचिव (संगठन) नियुक्त किया है। छत्तीसगढ़ में कर्मवीर और मध्यप्रदेश में चंद्रशेखर को महासचिव (संगठन) की जिम्मेदारी दी गई है।
ओडिशा में मानस मोहंती को महासचिव (संगठन), जबकि पंजाब और चंडीगढ़ में मंत्री श्रीनिवासुलु को यह दायित्व सौंपा गया है। झारखंड में पवन साई और हिमाचल प्रदेश में सिद्धार्थन को महासचिव (संगठन) नियुक्त किया गया है। तेलंगाना में दशरथ को संयुक्त महासचिव (संगठन) बनाया गया है।
गुजरात में रत्नाकर को महासचिव (संगठन) और अरुण बिन्नाडी को संयुक्त महासचिव (संगठन) की जिम्मेदारी दी गई है। उत्तराखंड में फणींद्रनाथ शर्मा को महासचिव (संगठन) नियुक्त किया गया है।
भाजपा के इस संगठनात्मक फेरबदल के तहत विभिन्न राज्यों में पार्टी के संगठनात्मक दायित्वों का पुनर्विन्यास किया गया है। इन नियुक्तियों के जरिए राज्य इकाइयों में संगठनात्मक जिम्मेदारियों का नया ढांचा निर्धारित किया गया है।




