होम ब्रेकिंग न्यूज ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मुंबई में गरजे ठाकरे बंधु, निकाला ‘विराट गर्जना...

ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मुंबई में गरजे ठाकरे बंधु, निकाला ‘विराट गर्जना मोर्चा

0

मुंबई, 04 अक्टूबर। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ रविवार को मुंबई में विपक्षी दलों ने बड़ा प्रदर्शन किया। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) अध्यक्ष राज ठाकरे ने संयुक्त रूप से ‘विराट गर्जना मोर्चा’ का नेतृत्व किया। मार्च में कांग्रेस और शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP-SP) के नेता और कार्यकर्ता भी शामिल हुए।

       यह मार्च दक्षिण मुंबई के मेट्रो सिनेमा से शुरू होकर बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) मुख्यालय तक पहुंचा। प्रदर्शनकारियों ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे या उन्हें पद से हटाने की मांग की।

       मोर्चे में राजनीतिक दलों के झंडों के बजाय केवल राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा लेकर आने की अपील की गई थी। आयोजन को चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर विपक्षी दलों के संयुक्त विरोध के रूप में पेश किया गया।

       मार्च के बाद आयोजित सभा को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘Make in India’ नारे का उल्लेख करते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यदि ‘Make in India’ के नाम पर तानाशाही को बढ़ावा दिया जाएगा, तो उसका विरोध किया जाएगा। उन्होंने लोकतांत्रिक संस्थाओं और चुनाव प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए।

      वहीं, राज ठाकरे ने कहा कि विपक्ष को इस बात से आपत्ति नहीं है कि कोई दल सत्ता में है, बल्कि सवाल यह है कि सत्ता का इस्तेमाल किस तरह किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि देश के मतदाताओं को यह तय करने का अधिकार होना चाहिए कि वे किसे चुनना चाहते हैं और किसे सत्ता में भेजना चाहते हैं।

      राज ठाकरे ने SIR प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए और इसे रद्द करने की मांग की। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर EVM के स्थान पर बैलेट पेपर से मतदान की वकालत भी की।

       उन्होंने सत्ता के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए उद्योगपतियों को जमीन, जंगल, हवाई अड्डे और बंदरगाह दिए जाने को लेकर भी सवाल उठाए। राज ठाकरे ने कहा कि लोकतंत्र में मतदाताओं के फैसले को सर्वोच्च महत्व मिलना चाहिए।

      ‘विराट गर्जना मोर्चा’ में उद्धव और राज ठाकरे के साथ कांग्रेस तथा NCP (SP) के नेताओं की मौजूदगी से विपक्षी एकजुटता का संदेश भी सामने आया। दोनों ठाकरे नेताओं का एक मंच पर आना भी इस प्रदर्शन की प्रमुख राजनीतिक विशेषता रही।

       प्रदर्शन का मुख्य केंद्र SIR और मतदाता सूची से जुड़े कथित विवाद रहे। प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग से प्रक्रिया को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर स्पष्टता की मांग करते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई।