रायपुर, 09 अक्टूबर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शुक्रवार को राजधानी रायपुर स्थित निवास कार्यालय में मुख्यमंत्री सुशासन फेलोशिप के द्वितीय बैच के 36 युवा प्रतिभागियों से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने युवाओं को अपने ज्ञान, कौशल और नवाचार के माध्यम से जनकल्याण तथा प्रदेश के विकास में योगदान देने के लिए प्रेरित किया।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि युवा शक्ति ही राष्ट्र शक्ति है। विकसित भारत-2047 के संकल्प को साकार करने में युवाओं की भूमिका निर्णायक होगी। उन्होंने फेलोशिप के प्रतिभागियों से शासन की कार्यप्रणाली को समझने के साथ जनसमस्याओं के व्यावहारिक समाधान खोजने और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सुझाव देने को कहा।
उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में शिक्षा और कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए अनेक प्रयास किए जा रहे हैं। प्रदेश में आईआईटी, आईआईएम, एम्स और अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों के माध्यम से उच्च शिक्षा के अवसर उपलब्ध हैं। लाइवलीहुड कॉलेजों और आईटीआई के उन्नयन के जरिए युवाओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य युवाओं को प्रदेश में ही बेहतर रोजगार उपलब्ध कराने के साथ उन्हें उद्यमिता के लिए भी प्रोत्साहित करना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार निवेश प्रस्तावों को वास्तविक परियोजनाओं और रोजगार के अवसरों में बदलने पर जोर दे रही है। नई औद्योगिक नीति में स्थानीय युवाओं, महिला उद्यमियों तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के उद्यमियों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। सेमीकंडक्टर, टेक्सटाइल और स्वास्थ्य सेवाओं जैसे क्षेत्रों में निवेश से रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
उन्होंने आधुनिक तकनीक के महत्व पर जोर देते हुए बताया कि राज्य के बजट में एआई मिशन के लिए 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके तहत छह लाख विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की शिक्षा देने और लगभग डेढ़ हजार अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य है।
अपने जीवन के संघर्षों को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि लगभग दस वर्ष की उम्र में पिता के निधन के बाद उन्हें परिवार और खेती-बाड़ी की जिम्मेदारियां संभालनी पड़ीं। उन्होंने कहा कि जीवन में मिली प्रत्येक जिम्मेदारी को निष्ठा और ईमानदारी से निभाने का प्रयास किया। गांव के सरपंच से विधायक, सांसद और केंद्रीय राज्यमंत्री तक का सफर तय करने के बाद मुख्यमंत्री के रूप में जनसेवा का अवसर मिलना उनके लिए महत्वपूर्ण अनुभव है।
मुख्यमंत्री ने युवा फेलो से कहा कि वे जिलों में कार्य करते समय स्थानीय परिस्थितियों और लोगों की वास्तविक जरूरतों को समझें। आंकड़ों, प्रमाणों और मैदानी अनुभव के आधार पर ऐसे सुझाव दें, जिनसे सरकारी योजनाओं और जनसेवाओं को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
सुशासन एवं अभिसरण विभाग के सचिव एवं मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत ने बताया कि दो वर्षीय फेलोशिप में पांच माह का अध्ययन एवं प्रशिक्षण तथा 19 माह का मैदानी अनुभव शामिल है। प्रारंभिक तीन माह आईआईएम रायपुर में प्रशिक्षण के बाद प्रतिभागी जिला प्रशासन के साथ कार्य करेंगे। इस दौरान वे प्रशासनिक प्रक्रियाओं, योजनाओं के क्रियान्वयन और जनसेवाओं की कार्यप्रणाली को समझेंगे।
सुशासन एवं अभिसरण विभाग द्वारा आईआईएम रायपुर और ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया के सहयोग से संचालित इस कार्यक्रम के द्वितीय बैच में प्रदेश के 14 जिलों से 36 युवाओं का चयन किया गया है। ये युवा नीतिगत विश्लेषण, योजनाओं की निगरानी, विभागीय समन्वय और जनसेवाओं में सुधार के प्रयासों में सहयोग करेंगे।




