लखनऊ, 14 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश में लंबे समय से प्रतीक्षित ग्राम पंचायत चुनावों को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश दिया है। अदालत ने राज्य सरकार को तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव की प्रक्रिया पूरी कराने का निर्देश दिया है। साथ ही स्पष्ट किया है कि चुनाव संपन्न होने तक निवर्तमान ग्राम प्रधान प्रशासक के रूप में कामकाज संभालते रहेंगे।
ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद समय पर चुनाव नहीं कराए जाने और प्रशासकों की नियुक्ति को लेकर कानूनी विवाद खड़ा हो गया था। योगी सरकार ने 25 मई को निवर्तमान ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक नियुक्त करने का निर्णय लिया था। इस फैसले को विभिन्न जनहित याचिकाओं के माध्यम से अदालत में चुनौती दी गई थी।
राज्य सरकार, पंचायती राज विभाग के निदेशक और जिला स्तरीय अधिकारियों को पक्षकार बनाकर दायर इन याचिकाओं पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाया। अदालत ने पंचायत चुनावों से संबंधित 11 याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की। जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने करीब तीन घंटे तक चली बहस के बाद फैसला सुनाया।
अदालत ने चुनाव होने तक निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक के रूप में कार्य करते रहने की अनुमति देकर मौजूदा व्यवस्था बरकरार रखी है। इससे पंचायतों के प्रशासनिक कामकाज को चुनाव संपन्न होने तक जारी रखने का रास्ता साफ हुआ है। याचिकाकर्ता दशरथ यादव सहित अन्य पक्षों की ओर से उठाई गई आपत्तियों पर सुनवाई के बाद अदालत ने यह निर्देश दिया।
ओबीसी आयोग की रिपोर्ट पर जताया था असंतोष
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से प्रस्तुत अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आयोग की रिपोर्ट पर असंतोष व्यक्त किया था। अदालत ने मौखिक टिप्पणी में रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा था कि ऐसा प्रतीत होता है कि इसे जमीनी स्तर पर अध्ययन करने के बजाय कार्यालय में बैठकर तैयार किया गया है।
आरक्षण निर्धारण पंचायत चुनाव की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में आयोग की रिपोर्ट को लेकर अदालत की टिप्पणियों के बाद राज्य सरकार के सामने चुनाव संबंधी तैयारियों को निर्धारित कानूनी प्रावधानों के अनुरूप पूरा करने की चुनौती है।
चुनावी तैयारियों में आएगी तेजी
हाईकोर्ट के आदेश के बाद उत्तर प्रदेश पंचायती राज विभाग और राज्य निर्वाचन आयोग को निर्धारित समयसीमा के भीतर चुनाव संबंधी तैयारियां पूरी करनी होंगी। इसमें मतदाता सूची का पुनरीक्षण, आरक्षण निर्धारण और चुनाव कार्यक्रम की घोषणा जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं।
पंचायत चुनावों में देरी के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियां प्रभावित हो रही थीं। अब अदालत के निर्देश के बाद चुनाव की तैयारियों में तेजी आने की उम्मीद है। हालांकि, चुनाव की वास्तविक तारीखों और विस्तृत कार्यक्रम को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग की आधिकारिक घोषणा का इंतजार रहेगा।




