कोलकाता, 18 अक्टूबर। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़ के मामले में पुलिस ने पूजा समिति के पदाधिकारियों समेत सात लोगों को गिरफ्तार किया है। इस हादसे में 19 लोगों की मौत हो गई, जबकि 25 अन्य घायल हुए हैं। पुलिस भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था में कथित लापरवाही की जांच कर रही है।
गिरफ्तार आरोपियों में चोरबागान दुर्गा पूजा समिति के सचिव राज कुमार सेवड़ा और उपाध्यक्ष शांतनु दुबे के अलावा पंडाल निर्माण, भीड़ नियंत्रण और निजी सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े लोग शामिल हैं। इससे पहले पुलिस ने पूछताछ के लिए 14 लोगों को हिरासत में लिया था।
पुलिस यह पता लगा रही है कि पंडाल में उमड़ी भीड़ को नियंत्रित करने और श्रद्धालुओं की सुरक्षित आवाजाही के लिए पर्याप्त इंतजाम किए गए थे या नहीं। मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 105, 110 और 3(5) के तहत केस दर्ज किया गया है।
बोबाजार के कुछ हिस्सों में निषेधाज्ञा
हादसे के बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बोबाजार थाने के अंतर्गत आने वाले कुछ इलाकों में 18 से 20 अक्टूबर तक भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 लागू की गई है। इसके तहत पांच या उससे अधिक लोगों के गैरकानूनी जमावड़े, लाठी या अन्य खतरनाक हथियार लेकर चलने तथा शांति भंग करने वाली गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया गया है।
भारी बारिश के बीच मची थी भगदड़
यह हादसा 17 अक्टूबर की शाम भारी बारिश के दौरान पंडाल में भीड़ बढ़ने के बाद हुआ था। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, भीड़ के दबाव और पंडाल में की गई घोषणा को भगदड़ की संभावित वजहों में शामिल किया गया है। हालांकि, घटना के वास्तविक कारणों और सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित चूक का पता विस्तृत जांच के बाद ही चल सकेगा।
पुलिस का कहना है कि जांच के जरिए हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करने और लापरवाही के पहलुओं का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।




