चीन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की अध्यक्षता वाली गाजा शांति परिषद में शामिल होने पर अनिच्छा जताई है। कहा, चीन का मानना है कि कोई भी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था संयुक्त राष्ट्र के अंतर्गत ही कार्य करनी चाहिए जबकि इस परिषद का संबंध संयुक्त राष्ट्र से नहीं है।
इटली ने शांति परिषद से दूर रहने के संकेत देकर चौंका दिया है। सरकारी सूत्रों के हवाले से अखबार कोरिएर डेला सेरा ने इस आशय खबर प्रकाशित की है। कहा गया है कि परिषद में शामिल होने से इटली के संविधान का उल्लंघन होगा। फ्रांस, नार्वे और स्वीडन ने भी ट्रंप की शांति परिषद में शामिल होने से इन्कार कर दिया है। भारत को भी परिषद में शामिल होने का निमंत्रण प्राप्त हुआ है लेकिन सरकार ने अभी इस पर कोई निर्णय नहीं लिया है।
दावोस के लिए रवाना होने से पहले इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने शांति परिषद में शामिल होने की घोषणा की है। पहले उनके कार्यालय ने इस परिषद कार्यकारी समिति में तुर्किये को शामिल किए जाने को लेकर आपत्ति जताई थी। जबकि पाकिस्तान ने भी ट्रंप की शांति परिषद में शामिल होने की घोषणा की है।
शांति परिषद में कितने देश?
अमेरिका ने कहा है कि 20 देश शांति परिषद में शामिल होने के लिए सहमति जता चुके हैं। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा, चीन हमेशा से सही मायनों में बहुध्रुवीय व्यवस्था का समर्थक रहा है। साथ ही वह संयुक्त राष्ट्र के ढांचे में बनी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का पूरे मनोयोग से पालन करता है।
गुओ अमेरिकी राष्ट्रपति के उस बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे थे जिसमें ट्रंप ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र अभी कार्य कर रहा है लेकिन भविष्य में शांति परिषद (बोर्ड आफ पीस) उसका स्थान ले सकती है। चीन के प्रवक्ता ने कहा, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किस तरह की स्थितियां पैदा हो रही हैं लेकिन चीन संयुक्त राष्ट्र की बनाई अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को ही मानेगा, उसके नियमों का पालन करेगा।
गाजा शांति परिषद की नियमावली अभी सार्वजनिक नहीं हुई है लेकिन अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि इस परिषद को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की तरह संचालित करने की ट्रंप की योजना है। कूटनीतिज्ञों का मानना है कि शांति परिषद विश्व में संयुक्त राष्ट्र के प्रभाव को कम केरेगी।
देना होगा एक अरब डॉलर का योगदान
अपुष्ट सूत्रों के अनुसार शांति परिषद की स्थायी सदस्यता के लिए एक अरब डालर का योगदान देना होगा। गुरुवार स्विट्जरलैंड के दावोस शहर में ट्रंप ने विश्व आर्थिक मंच के कार्यक्रम से इतर शांति परिषद के गठन के समारोह में शिरकत की है। यह परिषद गाजा में युद्धविराम के बाद की योजना पर नजर रखेगी। ट्रंप की शांति योजना के चलते ही गाजा में युद्धविराम हुआ है।
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