
रायपुर, 19 फरवरी।छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग द्वारा बिजली दरों में प्रस्तावित वृद्धि के विरोध में शहर जिला कांग्रेस कमेटी ने आज जनसुनवाई में सशक्त आपत्ति दर्ज कराई। न्यू शांति नगर स्थित आयोग कार्यालय के बाहर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। हाथों में तख्तियां लेकर कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और बिजली दर वृद्धि प्रस्ताव को तत्काल निरस्त करने की मांग की।
इस अवसर पर शहर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष श्रीकुमार शंकर मेनन ने कहा कि प्रस्तावित दर वृद्धि आम जनता के खिलाफ सुनियोजित आर्थिक हमला है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में स्वयं की उत्पादन क्षमता घटकर लगभग 30 प्रतिशत रह गई है और सरकार अपनी विफलताओं का बोझ आम उपभोक्ताओं पर डाल रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि पिछले 12 वर्षों से स्टील उद्योगों को लोड फैक्टर के नाम पर भारी छूट दी जा रही है, जिससे प्रतिवर्ष लगभग 1500 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। उनके अनुसार, इस घाटे की भरपाई बड़े उद्योगपतियों से करने के बजाय छोटे उपभोक्ताओं, मध्यम वर्ग और किसानों से की जा रही है।
पूर्व महापौर प्रमोद दुबे ने सरकार पर उद्योगपतियों को राहत देने और आम नागरिकों पर आर्थिक बोझ डालने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश की राज्य उत्पादन कंपनी की बिजली दर लगभग 3.51 रुपये प्रति यूनिट है, जबकि बाजार से महंगी बिजली खरीदने के कारण औसत दर 4.07 रुपये प्रति यूनिट तक पहुंच गई है। सरकार अपनी खरीद नीति की विफलता छिपाने के लिए दर वृद्धि का सहारा ले रही है।
पूर्व विधायक कुलदीप जुनेजा ने स्मार्ट मीटर योजना पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रदेश के लगभग 30 लाख उपभोक्ताओं पर 90 रुपये प्रतिमाह मीटर किराए का अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है। उन्होंने कहा कि कई उपभोक्ताओं का मासिक बिल 100 से 200 रुपये के बीच होता है, ऐसे में यह अतिरिक्त शुल्क अनुचित है। उन्होंने इस योजना में संभावित भ्रष्टाचार की उच्च स्तरीय जांच कराने और इसे तत्काल प्रभाव से रोकने की मांग की।
कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि बिजली दर वृद्धि का प्रस्ताव वापस नहीं लिया गया, तो पार्टी चरणबद्ध आंदोलन करेगी और सड़क से सदन तक संघर्ष जारी रहेगा।
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