होर्मुज में फंसे हैं दुनियाभर के टैंकर, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडरा रहा खतरा

पश्चिम एशिया की सबसे अहम समुद्री जीवनरेखा होर्मुज स्ट्रेट इस वक्त ऐसे संकट में फंसी है, जिसने पूरी दुनिया की धड़कनें थाम दी हैं। सैकड़ों तेल टैंकर समुद्र में रुके खड़े हैं न आगे बढ़ पा रहे, न पीछे लौट पा रहे। हालात ऐसे हैं कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर खतरे के काले बादल मंडराने लगे हैं। ईरान ने अमेरिका और इजरायल के हमलों के जवाब में इस अहम समुद्री रास्ते को लगभग जाम कर दिया है।
तेल की कीमतें उछाल पर हैं और बाजारों में घबराहट साफ दिख रही है। इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि इस रास्ते को किसी भी कीमत पर खोला जाएगा। इतना ही नहीं, उन्होंने ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व के साथ मिलकर इस जलडमरूमध्य को संयुक्त रूप से नियंत्रित करने तक का संकेत दे दिया है।
संकरा रास्ता, घातक मौका
होर्मुज स्ट्रेट बेहद संकरा और उथला है। यहां से गुजरने वाले जहाज ईरान के पहाड़ी तट के इतने करीब आते हैं कि हमला करना आसान हो जाता है। यही इसकी सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत है। ईरान अपने मिसाइल, ड्रोन और हथियारों को पहाड़ों, गुफाओं और सुरंगों में छिपाकर रखता है।
जैसे ही जहाज करीब आता है, अचानक हमला किया जाता है और प्रतिक्रिया देने के लिए जहाजों के पास केवल कुछ मिनट ही होते हैं।
17 हमले, बढ़ता खतरा
फरवरी के अंत से शुरू हुए इस संघर्ष में अब तक करीब 17 जहाजों पर हमला हो चुका है। यह बताने के लिए काफी है कि खतरा कितना गंभीर है। ईरान के मिसाइल सिस्टम मोबाइल हैं, वे लगातार जगह बदलते रहते हैं। यही वजह है कि अमेरिका और इजरायल के हजारों हमलों के बावजूद उन्हें पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सका।
अमेरिका के लिए क्यों मुश्किल है रास्ता खोलना
अगर अमेरिका इस रास्ते को खोलने के लिए सैन्य कदम उठाता है, तो यह एक बड़ा और बेहद जोखिम भरा आपरेशन होगा। इसमें कई स्तरों पर सुरक्षा व्यवस्था करनी पड़ेगी।
तेल टैंकरों को सुरक्षित निकालने के लिए उनके साथ युद्धपोतों की एस्कार्ट व्यवस्था
समुद्र में बिछाई गई माइंस (बारूदी सुरंगों) को खोजकर हटाना
हवा से होने वाले खतरे, जैसे ड्रोन और मिसाइल हमलों को रोकना
कुल मिलाकर, यह एक जटिल और बहु-स्तरीय सैन्य अभियान होगा, जिसमें हर मोर्चे पर लगातार सतर्कता जरूरी होगी।
युद्धपोत भी खतरे में
अमेरिकी डिस्ट्रायर जहाज इस तरह के नजदीकी हमलों के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हैं। उनका हर हिस्सा हमले के लिए संवेदनशील है यानी खतरा सिर्फ टैंकरों को नहीं, बल्कि युद्धपोतों को भी है।
अगर समुद्र में माइंस बिछी हैं, तो हालात पूरी तरह बदल जाते हैं। कोई भी देश अपने बड़े जहाज जोखिम में नहीं डालेगा। माइंस हटाने में हफ्तों लग सकते हैं। इस दौरान सैनिक सीधे खतरे में होंगे।
जमीनी कार्रवाई: युद्ध को और भड़का सकती हैअमेरिकी मरीन सैनिक क्षेत्र की ओर बढ़ रहे हैं। वे छोटे द्वीपों पर कब्जा कर एयर डिफेंस सिस्टम लगा सकते हैं। लेकिन, ईरान की सेना बड़ी और मजबूत है। सैनिकों के मारे जाने या पकड़े जाने का खतरा है। इससे युद्ध और तेज हो सकता है।
500 टैंकर रुके, दुनिया ठहरी
फारस की खाड़ी में करीब 500 टैंकर खड़े हैं और आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं कर रहे। जबकि सामान्य समय में हर दिन करीब 80 टैंकर इस रास्ते से गुजरते थे।क्यों थम गया सब कुछ?कंपनियां जोखिम लेने से बच रही हैं और बीमा कंपनियां भी पीछे हट चुकी हैं।
ऐसे माहौल में एक भी हमला पूरे भरोसे को खत्म कर सकता है। भले ही सेना सुरक्षा मुहैया कराए, लेकिन एक समय में सीमित संख्या में ही जहाजों को सुरक्षित निकाला जा सकता है। इतने बड़े समुद्री ट्रैफिक को संभालना संभव नहीं है, इसलिए हालात के जल्द सामान्य होने की संभावना कम है।
खतरा सिर्फ एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। ईरान ने केवल जलडमरूमध्य ही नहीं, बल्कि फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में भी जहाजों को निशाना बनाया है। इसका मतलब है कि पूरे समुद्री मार्ग में जोखिम बना हुआ है।
एक हमला और सब खत्म
सबसे बड़ी चिंता यही है कि एक भी सफल हमला पूरे भरोसे को फिर से तोड़ सकता है। कंपनियों और बीमा बाजार में विश्वास बहाल करना अब सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सैन्य ताकत से रास्ता आंशिक रूप से खोला जा सकता है, लेकिन हालात पूरी तरह सामान्य तभी होंगे जब कूटनीतिक और राजनीतिक समाधान निकलेगा। होर्मुज स्ट्रेट सिर्फ एक समुद्री मार्ग नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की धड़कन है।
यहां पैदा हुआ संकट अब केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को झकझोर देने वाली बड़ी चुनौती बन चुका है।




