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दीपक बैज ने बारिश के दौरान नकटी गांव में कार्रवाई को बताया अमानवीय और गैरकानूनी

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रायपुर, 01 जुलाई। नकटी गांव में प्रधानमंत्री आवास और अन्य मकानों को तोड़े जाने की कार्रवाई को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने साय सरकार पर तीखा हमला बोला है।

     श्री बैज ने राजधानी स्थित राजीव भवन में आयोजित पत्रकार वार्ता में कहा कि यह कार्रवाई भाजपा सरकार के गरीब विरोधी रवैये को उजागर करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि बारिश के मौसम में विस्थापन और तोड़फोड़ की कार्रवाई न केवल अमानवीय है, बल्कि पूरी तरह गैरकानूनी भी है।

     बैज ने कहा कि छत्तीसगढ़ में मानसून आने के बाद सामान्यतः भूमि सीमांकन और विस्थापन जैसी प्रक्रियाएं नहीं की जातीं। इसके बावजूद 29 जून को नकटी गांव में मकानों पर बुलडोजर चलाया गया, जो स्थापित नियमों और मानवीय संवेदनाओं के खिलाफ है। उन्होंने मांग की कि इस कार्रवाई में शामिल अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। यदि सरकार ऐसा नहीं करती है तो कांग्रेस इस मामले को न्यायालय तक ले जाएगी।

     प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि प्रभावित परिवारों को अपना सामान हटाने तक का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया और पुनर्वास की समुचित व्यवस्था किए बिना ही उनके घरों को ध्वस्त कर दिया गया। उन्होंने कहा कि जिन स्थानों पर विस्थापितों को बसाया जा रहा है, वे उनके वर्तमान निवास से काफी दूर हैं, जिससे उनके सामने रोजमर्रा की परेशानियां खड़ी होंगी।

     दीपक बैज ने पुनर्वास व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि 20 से 25 सदस्यों वाले परिवारों को मात्र एक कमरे का आवास दिया जा रहा है, जहां बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने यह भी पूछा कि प्रभावितों को दिए गए अस्थायी आवंटन पत्रों में 5.50 लाख और 8.50 लाख रुपये की लागत वाले मकानों का उल्लेख है, तो इसकी राशि कौन वहन करेगा। उनका कहना था कि सरकार को यह आवास पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराने चाहिए।

    बैज ने बताया कि कांग्रेस विधायक जनक ध्रुव ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर नकटी में प्रस्तावित विधायक आवास लेने से इनकार कर दिया है। वहीं अनुसूचित जाति की विधायक चातुरी नंद ने भी ऐसे आवास में रहने से मना करते हुए कहा है कि गरीबों के उजड़े आशियानों की जमीन पर बने मकान को वह स्वीकार नहीं करेंगी।

उन्होंने कांग्रेस और भाजपा, दोनों दलों के विधायकों से अपील की कि वे भी इस कॉलोनी में आवास लेने से इनकार करें। बैज ने कहा कि सरकार के पास नया रायपुर में हजारों एकड़ खाली भूमि उपलब्ध है और वह विभिन्न संस्थाओं व कंपनियों को रियायती दरों पर जमीन आवंटित करती रही है। ऐसे में विधायक कॉलोनी के लिए गरीबों के घर उजाड़ने की आवश्यकता नहीं थी।