नई दिल्ली, 21 अगस्त। जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को छात्रों के प्रदर्शन के दौरान कथित पैलेट गन से घायल हुए 19 वर्षीय साहिल लोचब की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को आखिरकार FIR दर्ज कर ली। FIR अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज की गई है। कार्रवाई उस समय हुई जब लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पीड़ित साहिल लोचब और कांग्रेस नेताओं के साथ संसद मार्ग थाने में धरने पर बैठ गए और पुलिस से तत्काल मामला दर्ज करने की मांग की।
दिल्ली पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 118 और 125 के तहत केस दर्ज किया है। धारा 118 खतरनाक हथियार या साधन से जान-बूझकर चोट या गंभीर चोट पहुंचाने से संबंधित है, जबकि धारा 125 किसी व्यक्ति की जान या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालने से संबंधित है।
प्रथम सूचना रिपोर्ट(FIR) दर्ज होने के बाद राहुल गांधी ने इसे न्याय की दिशा में पहला कदम बताया। उन्होंने कहा कि साहिल के शरीर में छर्रे लगे हैं और उसकी आंख को गंभीर नुकसान पहुंचा है। राहुल ने दावा किया कि वह सुबह करीब 11.30 बजे FIR दर्ज कराने के लिए पुलिस के पास पहुंचे थे, लेकिन शाम करीब 6.45 बजे मामला दर्ज किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि राष्ट्रीय राजधानी में स्थित पुलिस थाने में FIR दर्ज कराने में इतना समय लग सकता है तो गांवों और छोटे शहरों में आम नागरिकों की स्थिति क्या होगी।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि पुलिस अधिकारियों ने शुरुआत में ‘ऊपर से आदेश’ होने की बात कहकर FIR दर्ज करने में असमर्थता जताई थी। उन्होंने कहा कि उनकी मांग केवल शिकायत दर्ज करने और जांच अधिकारी का नाम बताने की थी। राहुल के अनुसार, जब तक FIR दर्ज नहीं हुई, तब तक वह थाने से हटने के लिए तैयार नहीं थे।
इससे पहले राहुल गांधी साहिल लोचब को लेकर पहले मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन पहुंचे थे। वहां FIR दर्ज कराने की मांग पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के बाद वह साहिल के साथ संसद मार्ग स्थित DCP कार्यालय पहुंचे। बातचीत से समाधान नहीं निकलने पर राहुल गांधी थाने में ही धरने पर बैठ गए। बाद में कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा, पार्टी महासचिव जयराम रमेश और अन्य वरिष्ठ नेता भी उनके साथ धरने में शामिल हुए। पुलिस ने इलाके में RAF की तैनाती भी की थी।
साहिल लोचब का आरोप है कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई के बीच पैलेट गन के छर्रे उन्हें लगे। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उनके शरीर में बड़ी संख्या में छर्रे लगे और उनकी एक आंख की रोशनी गंभीर रूप से प्रभावित हुई। कुछ रिपोर्टों में शरीर में 200 से अधिक पैलेट होने का दावा किया गया है। इन दावों की जांच अब FIR के बाद पुलिस जांच का हिस्सा होगी।
पैलेट गन के कथित इस्तेमाल को लेकर विवाद पिछले महीने से ही जारी है। 20 जुलाई के प्रदर्शन में कई प्रदर्शनकारियों के घायल होने की खबरों के बाद सुरक्षा बलों की कार्रवाई पर सवाल उठे थे। वहीं, पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर आधिकारिक दावों और घायल प्रदर्शनकारियों के आरोपों के बीच अंतर भी सामने आया है। इस मामले की जांच अब यह निर्धारित करने में महत्वपूर्ण होगी कि साहिल को चोट किस परिस्थिति में लगी और पैलेट गन का इस्तेमाल किसने किया।
एफआईआर दर्ज होने के बाद साहिल लोचब ने राहुल गांधी के समर्थन के लिए उनका आभार जताया और कहा कि जब तक देश में राहुल गांधी जैसे नेता छात्रों की आवाज उठाते रहेंगे, उनकी आवाज दबाई नहीं जा सकती। अब इस मामले में पुलिस की जांच और FIR में दर्ज आरोपों की आगे की कार्रवाई पर सभी की नजर रहेगी।
एफआईआर दर्ज होने से तत्काल राजनीतिक टकराव भले ही थम गया हो, लेकिन इस घटना ने लोकतांत्रिक प्रदर्शनों के दौरान पुलिस बल के इस्तेमाल, जवाबदेही और नागरिकों के अधिकारों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब चुनौती केवल FIR दर्ज करने तक सीमित नहीं है, बल्कि निष्पक्ष जांच कर यह तय करना है कि साहिल लोचब और अन्य प्रदर्शनकारियों को चोट कैसे लगी और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी थी।




