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बिजली वितरण में निजी कंपनियों को लाइसेंस देने के फैसले का कांग्रेस ने किया विरोध

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रायपुर, 26 अगस्त। छत्तीसगढ़ में बिजली वितरण के लिए निजी कंपनियों को लाइसेंस देने और सरकारी बिजली कंपनी को शेयर बाजार के जरिए पूंजी जुटाने की सरकार की योजना को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने तीखा विरोध जताया है। उन्होंने कहा कि बिजली वितरण अत्यावश्यक सार्वजनिक सेवा है और इस पर सरकार का प्रत्यक्ष एवं पूर्ण नियंत्रण होना चाहिए। निजी कंपनियों को वितरण व्यवस्था में प्रवेश देने से जनहित की जगह मुनाफा प्राथमिकता बन सकता है।

    श्री बैज ने आज यहां जारी बयान में आरोप लगाया कि भाजपा सरकार बिजली वितरण व्यवस्था के मौजूदा नियमों में बदलाव कर निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि निजी कंपनियों का मुख्य उद्देश्य मुनाफा कमाना होगा, जबकि सरकारी बिजली व्यवस्था का मूल उद्देश्य उपभोक्ताओं को भरोसेमंद और सुलभ बिजली उपलब्ध कराना होना चाहिए।

सरकारी बिजली कंपनी को शेयर बाजार में ले जाने पर सवाल

   प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड (CSPGCL) को स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध करने के मंत्रिपरिषद के फैसले पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार प्रदेश के स्वामित्व वाली सरकारी कंपनी को शेयर बाजार में सूचीबद्ध कर धीरे-धीरे निजीकरण की दिशा में ले जाने का प्रयास कर रही है।

    सरकार ने आमजन और संस्थागत निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से CSPGCL को 200 करोड़ रुपये तक के नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCD) अथवा बॉन्ड जारी कर स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। कांग्रेस का आरोप है कि इस प्रक्रिया के जरिए सार्वजनिक क्षेत्र की बिजली कंपनी में निजी पूंजी की हिस्सेदारी बढ़ाने का रास्ता तैयार किया जा रहा है।

‘बिजली क्षेत्र में निजीकरण की जमीन तैयार कर रही सरकार’

    श्री बैज ने कहा कि छत्तीसगढ़ की बिजली कंपनियां आत्मनिर्भर हैं और राज्य में बिजली उत्पादन के लिए पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं। उनका आरोप है कि सरकार सरकारी बिजली कंपनियों के शेयर और वित्तीय साधनों के जरिए निजी क्षेत्र के लिए रास्ता खोल रही है।

    उन्होंने कहा कि सरकार की मौजूदा नीतियों को देखते हुए इस आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता कि भविष्य में राज्य की विद्युत वितरण व्यवस्था किसी बड़े निजी औद्योगिक समूह को सौंपने की दिशा में कदम बढ़ाया जाए। बैज ने इसे सरकार के आर्थिक कुप्रबंधन का परिणाम बताते हुए कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी को मजबूत करने के बजाय उसे बाजार के हवाले करने की तैयारी की जा रही है।