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शुल्क निर्धारण के बिना निजी विश्वविद्यालयों को काउंसलिंग में शामिल करना छात्रों के साथ अन्याय: संजय सिंह ठाकुर

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रायपुर, 30 अगस्त। छत्तीसगढ़ आरटीआई एक्टिविस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय सिंह ठाकुर ने निजी विश्वविद्यालयों को शुल्क निर्धारण किए बिना प्रवेश काउंसलिंग में शामिल किए जाने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि एक सितंबर से शुरू होने वाली प्रवेश काउंसलिंग में ऐसे निजी विश्वविद्यालयों को शामिल करना, जिनके विभिन्न व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की फीस अब तक निर्धारित नहीं हुई है, हजारों छात्रों और उनके अभिभावकों के हितों के साथ अन्याय है। इससे छात्रों को गंभीर आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

       श्री ठाकुर ने आज यहां जारी बयान में कहा कि पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय (PURC) की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कई निजी विश्वविद्यालयों के फार्मेसी सहित विभिन्न व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की फीस अब तक निर्धारित दिखाई नहीं दे रही है। इसके बावजूद इन विश्वविद्यालयों को प्रवेश प्रक्रिया में शामिल किया जा रहा है। उन्होंने इसे गंभीर अनियमितता बताते हुए पूरे मामले की पारदर्शी जांच की मांग की है।

      उन्होंने सवाल उठाया कि जब किसी निजी विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम की फीस निर्धारित ही नहीं हुई है, तो काउंसलिंग के दौरान प्रवेश लेने वाले छात्रों से किस आधार पर शुल्क लिया जाएगा। यदि प्रवेश के बाद फीस निर्धारित की जाती है और उसमें बढ़ोतरी होती है, तो छात्रों और उनके अभिभावकों के आर्थिक हितों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी।

      श्री ठाकुर ने कहा कि प्रवेश काउंसलिंग की अनुमति देते समय राज्य सरकार को इस संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए थे। फीस निर्धारण की स्थिति स्पष्ट किए बिना निजी विश्वविद्यालयों को प्रवेश प्रक्रिया में शामिल करना छात्रों को अनिश्चितता में डालने वाला कदम है।

       उन्होंने कहा कि प्रदेश के निजी महाविद्यालय विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत निर्धारित शुल्क के आधार पर छात्रों को प्रवेश देने के लिए बाध्य हैं। ऐसे में निजी विश्वविद्यालयों को शुल्क निर्धारण के बिना प्रवेश प्रक्रिया में शामिल करने से समानता के सिद्धांत पर भी सवाल खड़े होते हैं। सभी संस्थानों के लिए शुल्क और प्रवेश प्रक्रिया को लेकर समान नियम लागू होने चाहिए।

       संजय सिंह ठाकुर ने राज्य सरकार से मांग की है कि जिन निजी विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रमों की फीस का विधिवत निर्धारण नहीं हुआ है, उन्हें शुल्क निर्धारण पूरा होने तक प्रवेश काउंसलिंग से बाहर रखा जाए। उन्होंने कहा कि छात्रों और अभिभावकों के आर्थिक हितों की रक्षा के लिए शुल्क निर्धारण की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और संबंधित जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।

       उन्होंने सरकार से यह भी स्पष्ट करने की मांग की कि बिना शुल्क निर्धारण के निजी विश्वविद्यालयों में प्रवेश लेने वाले छात्रों से कितनी फीस ली जाएगी और बाद में शुल्क निर्धारण होने की स्थिति में छात्रों को किसी प्रकार की आर्थिक परेशानी से कैसे बचाया जाएगा।