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उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों पर चुनाव का ऐलान

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नई दिल्ली, 22 सितंबर। भारत निर्वाचन आयोग ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल की कुल 12 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम घोषित कर दिया है। इनमें उत्तर प्रदेश की 10 और उत्तराखंड की एक सीट पर नियमित द्विवार्षिक चुनाव होंगे, जबकि पश्चिम बंगाल की एक सीट पर उपचुनाव कराया जाएगा। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले होने वाले राज्यसभा चुनाव को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इन चुनावों के परिणाम से उच्च सदन में विभिन्न दलों की संख्या और राज्य के सियासी समीकरणों पर असर पड़ सकता है।

        निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया 29 सितंबर को अधिसूचना जारी होने के साथ शुरू होगी। उम्मीदवार 6 अक्टूबर तक नामांकन दाखिल कर सकेंगे। 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी, जबकि 9 अक्टूबर तक नाम वापस लिए जा सकेंगे। जरूरत पड़ने पर 16 अक्टूबर को मतदान कराया जाएगा और इसी दिन मतगणना के बाद परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे।

        उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के 10 सदस्यों का कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त हो रहा है। कार्यकाल पूरा करने वाले प्रमुख सदस्यों में केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह, पूर्व उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा, पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के पुत्र नीरज शेखर, पूर्व डीजीपी बृजलाल, बीएल वर्मा, गीता उर्फ चंद्रप्रभा और सीमा शामिल हैं। विपक्षी खेमे से समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रो. रामगोपाल यादव और बहुजन समाज पार्टी के रामजी गौतम का कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है।

        उत्तर प्रदेश विधानसभा की मौजूदा संख्या 397 है। राज्यसभा चुनाव में एक सीट के लिए जीत का आंकड़ा करीब 37 विधायकों के समर्थन के आसपास रहेगा। विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी के पास करीब 300 विधायकों का मजबूत संख्याबल होने के कारण उसके कई उम्मीदवारों के निर्वाचित होने की स्थिति बनती है। हालांकि अंतिम तस्वीर नामांकन, उम्मीदवारों और सहयोगी दलों के रुख के बाद ही स्पष्ट होगी।

        भाजपा के लिए इस चुनाव में नए चेहरों को राज्यसभा भेजने का अवसर भी बन सकता है। पूर्व उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा को हाल ही में राज्यपाल नियुक्त किए जाने के बाद उनकी सीट खाली हो रही है। ऐसे में पार्टी की ओर से किन नेताओं को उच्च सदन में भेजा जाता है, इस पर भी राजनीतिक नजरें रहेंगी।

         इन चुनावों का एक महत्वपूर्ण पहलू बहुजन समाज पार्टी से जुड़ा है। रामजी गौतम का कार्यकाल समाप्त होने के बाद राज्यसभा में बसपा का मौजूदा प्रतिनिधित्व खत्म हो जाएगा। उत्तर प्रदेश विधानसभा में बसपा का कोई विधायक नहीं है, इसलिए मौजूदा संख्या बल के आधार पर पार्टी के लिए राज्यसभा की सीट हासिल करना बेहद कठिन है।

         समाजवादी पार्टी के सामने भी अपने मौजूदा प्रतिनिधित्व को बनाए रखने की चुनौती होगी। राज्यसभा चुनाव में विधानसभा की संख्या महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और इसी कारण चुनाव परिणाम से यह भी स्पष्ट होगा कि विपक्षी दल उच्च सदन में अपनी मौजूदा स्थिति को किस हद तक कायम रख पाते हैं।

         उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले राज्यसभा का यह चुनाव केवल रिक्त हो रही सीटों को भरने की संवैधानिक प्रक्रिया नहीं है। दलों के लिए यह अपने संख्याबल, सहयोगी दलों के साथ तालमेल और भविष्य की राजनीतिक रणनीति को परखने का भी अवसर होगा। हालांकि राज्यसभा चुनाव के परिणामों को सीधे विधानसभा चुनाव के परिणामों का संकेत मानना उचित नहीं होगा, लेकिन इनके जरिए प्रदेश की मौजूदा राजनीतिक ताकतों और उच्च सदन में उनके प्रतिनिधित्व की तस्वीर जरूर बदल सकती है।