रायपुर/केवड़िया, 23 सितंबर। फिल्मकार भरतबाला की डॉक्यूमेंट्री ‘रामनामी’ ने 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में श्रेष्ठ वृत्तचित्र (Best Documentary) का राष्ट्रीय पुरस्कार हासिल किया है। गुजरात के एकता नगर में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की तलहटी में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने निर्देशक भरतबाला को यह सम्मान प्रदान किया।
छत्तीसगढ़ के मध्य और उत्तरी क्षेत्रों में बसे रामनामी समुदाय की जीवनशैली, आस्था और परंपरा पर आधारित यह डॉक्यूमेंट्री उनकी अनूठी रामभक्ति को सामने लाती है। समुदाय के लोगों के शरीर पर ‘राम’ नाम का गोदना उनकी आस्था और पहचान का प्रमुख प्रतीक है।
फिल्म में गायक-संगीतकार कैलाश खेर की आवाज ने रामनामी समुदाय की आध्यात्मिक यात्रा को स्वर दिया है। उनका गीत ‘राम ही पार लगाएंगे’ फिल्म का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ‘बाहर राम, भीतर राम, मोरा रोम-रोम राम ही राम’ जैसे शब्द समुदाय की उस आस्था को अभिव्यक्त करते हैं, जिसमें राम नाम उनके जीवन और शरीर का अभिन्न हिस्सा है।
भरतबाला ने राष्ट्रीय पुरस्कार को रामनामी समुदाय और छत्तीसगढ़ के उन लोगों को समर्पित किया, जिन्होंने अपनी परंपराओं और जीवन की कहानियां फिल्मकारों के साथ साझा कीं। उन्होंने कहा कि उनके लिए डॉक्यूमेंट्री निर्माण केवल फिल्म बनाने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि लोगों की आवाज, स्मृतियों और जीवनशैली को संरक्षित करने का माध्यम है।
फिल्म में रामनामी समुदाय की उत्पत्ति और संघर्ष की कहानी भी सामने आती है। माना जाता है कि करीब 1890 में परसुराम भारद्वाज नामक दलित व्यक्ति को जातिगत कारणों से मंदिर में प्रवेश से रोक दिया गया था। इसके बाद उन्होंने अपने शरीर पर ‘राम’ नाम गुदवाया। धीरे-धीरे उनके समुदाय के अन्य लोगों ने भी इसे अपनाया। इस तरह शरीर को ही मंदिर मानने वाली यह परंपरा रामभक्ति और सामाजिक बहिष्कार के बीच विकसित हुई।
भरतबाला ने कहा कि छत्तीसगढ़ उनके लिए सांस्कृतिक खोज की असाधारण यात्रा रहा है। उन्होंने बैगा जनजाति, ढोकरा कला, बाइसन हॉर्न मारिया समुदाय, घोटुल परंपरा और सिरपुर की विरासत पर भी काम किया है। इन विषयों पर बनाई गई उनकी अन्य डॉक्यूमेंट्री रिलीज के लिए तैयार हैं।
भरतबाला गणपति फिल्म निर्देशक, पटकथा लेखक और निर्माता हैं। उन्होंने ए.आर. रहमान के साथ ‘वंदे मातरम्’ और ‘जन गण मन’ जैसे चर्चित प्रोजेक्ट किए हैं। उनकी पहली फीचर फिल्म ‘हरि ओम’ का प्रीमियर 2004 में टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में हुआ था। उन्होंने ‘इनक्रेडिबल इंडिया’ और ‘स्कूल चलें हम’ सहित 500 से अधिक विज्ञापन अभियानों का निर्देशन भी किया है।
उनकी पहल ‘वर्चुअल भारत’ के तहत भारत की अनकही कहानियों को लघु फिल्मों के माध्यम से दर्ज किया जा रहा है। 15 अगस्त 2019 को शुरू हुई इस परियोजना का लक्ष्य देशभर के आम लोगों, लोक परंपराओं, कला और लोककथाओं पर 1,000 लघु फिल्में बनाना है।




