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मतदाता सूची से 45 लाख नाम हटाने की ‘साजिश’ का आरोप

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बेंगलुरु, 1 अक्टूबर। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने राज्य में जारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाने की ‘साजिश’ की जा रही है। इसके विरोध में शिवकुमार बृहस्पतिवार को अपने मंत्रिमंडल के सहयोगियों और विधायकों के साथ राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) वी. अनबुकुमार के कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए।

      मुख्यमंत्री ने मांग की कि कथित चुनावी धोखाधड़ी की जांच कराई जाए और इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की जाए। उन्होंने कहा कि जब तक जांच के आदेश नहीं दिए जाते और प्राथमिकी दर्ज नहीं होती, तब तक वह धरना स्थल से नहीं हटेंगे।

      धरने पर बैठने से पहले शिवकुमार ने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी वी. अनबुकुमार के साथ करीब ढाई घंटे तक बैठक की। बैठक में एसआईआर के दौरान मतदाता सूची में नामों को लेकर सामने आ रहे कथित अनियमितताओं के मुद्दे पर चर्चा हुई। बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि एसआईआर की प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाने की कोशिश की जा रही है।

      बाद में संवाददाता सम्मेलन में शिवकुमार ने आरोप लगाया कि कुछ लोग अलग-अलग नामों से कई आवेदन कर रहे हैं, ताकि एसआईआर के तहत बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा सकें। उन्होंने इसे ‘बड़ा फर्जीवाड़ा’ बताते हुए पूरे मामले की जांच की मांग की।

       मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि इस कथित साजिश में भारतीय जनता पार्टी भी शामिल है। उनके मुताबिक, इसका उद्देश्य मतदाता सूची से अल्पसंख्यक, दलित और अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदाय के मतदाताओं के नाम हटाना है। शिवकुमार ने दावा किया कि करीब 45 लाख मतदाताओं के नाम अवैध तरीके से हटाने की साजिश की जा रही है।

       उन्होंने कहा कि मतदाता सूची लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियाद है और किसी भी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से हटाया जाना गंभीर मामला है। उन्होंने निर्वाचन अधिकारियों से इस मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की।