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वन्यजीव संरक्षण और निगरानी के लिए पहली बार संभाग स्तरीय कार्यशाला

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जगदलपुर, 3 अक्टूबर। वन्यप्राणी संरक्षण सप्ताह के तहत वन विद्यालय, जगदलपुर में पहली बार संभाग स्तरीय दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की जा रही है। कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान प्रबंधन द्वारा आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य मैदानी स्तर पर कार्यरत वन अधिकारियों और कर्मचारियों की दक्षता बढ़ाना तथा उन्हें वन्यजीवों की पहचान और निगरानी की आधुनिक तकनीकों से परिचित कराना है।

      कार्यशाला के प्रशिक्षण सत्र में राज्य वन्यजीव बोर्ड के सदस्य गौरव निलानी और एसडीओ योगेश रात्रे ने प्रेजेंटेशन के माध्यम से वनकर्मियों को वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। इस दौरान बाघों की शारीरिक विशेषताओं, रहन-सहन, व्यवहार, विचरण क्षेत्र (टेरिटरी) और उनकी गतिविधियों को समझने के तरीकों पर विस्तार से जानकारी दी गई।

      प्रशिक्षण में बाघ और तेंदुए के पगमार्क तथा जंगल में मिलने वाले अन्य संकेतों के बीच अंतर पहचानने पर विशेष जोर दिया गया। इसके साथ ही नर और मादा बाघ की पहचान, पगमार्क के पैड इंप्रेशन और फोटोग्राफिक तकनीक के माध्यम से वन्यजीवों की पहचान करने के तरीके भी बताए गए। बाघों के शिकार करने के तौर-तरीकों, पेड़ों पर मिलने वाले खरोंच के निशानों और उनके क्षेत्रीय चिह्नों की पहचान का भी प्रशिक्षण दिया गया।

        वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए कैमरा ट्रैप और आधुनिक मैदानी निगरानी तकनीकों की उपयोगिता समझाई गई। वहीं, वन्यजीव अपराधों की रोकथाम, अवैध शिकार पर नियंत्रण और सूचना तंत्र (मुखबिर नेटवर्क) को मजबूत बनाने के उपायों पर भी चर्चा की गई।

      कार्यशाला के पहले दिन सैद्धांतिक प्रशिक्षण के बाद प्रतिभागियों की परीक्षा आयोजित की गई, जिससे प्रशिक्षण के दौरान अर्जित जानकारी और उनकी समझ का आकलन किया जा सके। दूसरे दिन फील्ड विजिट और व्यावहारिक अभ्यास के माध्यम से अधिकारियों एवं कर्मचारियों को जंगल में पगमार्क तथा वन्यजीवों की मौजूदगी के अन्य संकेतों की पहचान करने का प्रशिक्षण दिया गया।