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राहुल गांधी और प्रियंका गांधी हिरासत में, आठ घंटे बाद धरना समाप्त

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नई दिल्ली, 6 अक्टूबर। चुनाव प्रणाली में कथित अनियमितताओं और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के विरोध में मंगलवार को कांग्रेस तथा विपक्षी दलों के प्रदर्शन के बाद पुलिस ने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई नेताओं को हिरासत में ले लिया। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी करीब आठ घंटे तक आकाशवाणी भवन परिसर में धरने पर बैठे रहे।

       राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और कांग्रेस के कई अन्य नेता मंगलवार दोपहर आकाशवाणी भवन परिसर पहुंचे थे। निर्वाचन आयोग के कार्यालय की ओर आगे बढ़ने की कोशिश के दौरान उन्हें पुलिस ने रोक दिया। इसके बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी परिसर में एक पेड़ के नीचे बैठ गए और वहीं धरना शुरू कर दिया।

         पुलिस ने रात करीब आठ बजे राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, कांग्रेस के अन्य नेताओं तथा कुछ सहयोगी दलों के नेताओं को हिरासत में लिया। पुलिस ने हिरासत में लिए गए नेताओं को बस में बैठाकर वहां से रवाना किया।

         इससे पहले विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन में शामिल दलों के सांसदों और नेताओं ने संसद मार्ग से निर्वाचन आयोग के मुख्यालय तक मार्च निकाला। पुलिस ने मार्च को रास्ते में ही रोक दिया और कई सांसदों एवं नेताओं को हिरासत में ले लिया।

          विपक्षी दलों की प्रमुख मांगों में मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाना तथा मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को रद्द करना शामिल है। विपक्ष का आरोप है कि चुनाव प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं और मतदाता सूचियों को लेकर पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए।

         धरने और हिरासत की कार्रवाई के बाद कांग्रेस ने सोशल मीडिया के जरिए केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष की आवाज दबाने के लिए पुलिस का इस्तेमाल कर रही है। कांग्रेस ने कहा कि वह लोकतंत्र की रक्षा के लिए अपना संघर्ष जारी रखेगी।

          कांग्रेस ने एक अन्य पोस्ट में आरोप लगाया कि आकाशवाणी भवन में पुलिस भेजकर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और अन्य सांसदों को जबरन हिरासत में लिया जा रहा है। पार्टी ने इसे पुलिसिया दमन करार देते हुए कहा कि विपक्ष इस तरह की कार्रवाई से पीछे हटने वाला नहीं है।

          राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के धरने तथा विपक्षी सांसदों के मार्च के कारण मंगलवार को राजधानी में राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं। विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार पर लगातार दबाव बनाने के संकेत दिए हैं।