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ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर राष्ट्रपति भवन तक मार्च करेगा इंडिया ब्लॉक

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नई दिल्ली, 09 अक्टूबर। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक के नेता राष्ट्रपति भवन तक मार्च निकालेंगे।

           विपक्षी नेताओं ने राष्ट्रपति से मुलाकात कर चुनाव प्रक्रिया, मताधिकार और लोकतंत्र से जुड़े मुद्दों पर अपनी चिंताएं रखने की योजना बनाई है। कांग्रेस सहित गठबंधन के विभिन्न दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त को तत्काल पद से हटाने की मांग दोहराते हुए आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है।

           कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि विपक्षी नेता संविधान की रक्षा करने वाली राष्ट्रपति से मिलकर लोकतंत्र और नागरिकों के मताधिकार की सुरक्षा का मुद्दा उठाना चाहते हैं। उन्होंने इसे पूरी तरह संवैधानिक कदम बताते हुए उम्मीद जताई कि राष्ट्रपति विपक्षी प्रतिनिधिमंडल को मुलाकात का अवसर देंगी।

           भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओर से इंडिया ब्लॉक को लोकतंत्र के लिए खतरा बताए जाने पर तिवारी ने पलटवार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में लोकतांत्रिक मूल्यों को नुकसान पहुंच रहा है और विपक्ष इसी के खिलाफ संघर्ष कर रहा है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त पर भी गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके खिलाफ प्रदर्शन और आंदोलन जारी रहेगा।

            पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव ने कहा कि राहुल गांधी लगातार कथित वोट चोरी, प्रश्नपत्र लीक और छात्रों से जुड़े मुद्दे उठा रहे हैं। उन्होंने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के खिलाफ साजिश रचे जाने का भी आरोप लगाया और कहा कि विपक्ष लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहा है। यादव ने मुख्य चुनाव आयुक्त को तत्काल बर्खास्त करने और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

           कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर उठ रहे सवाल अब व्यापक जन आंदोलन का रूप ले रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम काटे जाने के मुद्दे पर जनता जवाब मांग रही है। मसूद ने कहा कि विपक्ष लोकतांत्रिक अधिकारों को कमजोर नहीं होने देगा और उसका विरोध जारी रहेगा।

          कांग्रेस सांसद मनोज कुमार ने भी आंदोलन को लंबा चलाने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि कथित वोट चोरी के मामले में प्रभावित लोगों को न्याय मिलने तक विपक्ष का संघर्ष जारी रहेगा। उनके मुताबिक, आंदोलन कुछ दिनों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जरूरत पड़ने पर इसे लंबे समय तक चलाया जाएगा। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त से इस्तीफा देने और मतदाता सूची से हटाए गए बताए जा रहे करीब 13.5 करोड़ लोगों के वोट बहाल करने की मांग की। साथ ही उन्होंने कहा कि सरकारें आती-जाती रहती हैं, लेकिन लोकतंत्र में किसी को तानाशाही रवैया अपनाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

           राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद सुधाकर सिंह ने कहा कि उनकी पार्टी का मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ आंदोलन को लेकर रुख स्पष्ट है। उन्होंने इसे देश और लोकतंत्र से जुड़ी लड़ाई बताते हुए अन्य लोगों से भी इसमें शामिल होने की अपील की।

           वहीं, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के सांसद जॉन ब्रिटास ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन में कोई ढील नहीं दी जाएगी। उन्होंने बताया कि विपक्ष राष्ट्रपति से मुलाकात कर राजनीतिक मुद्दों और अपनी मांगों की गंभीरता से अवगत कराएगा।

           ब्रिटास ने दावा किया कि आने वाले दिनों में दिल्ली में होने वाले विरोध प्रदर्शनों में छात्रों और युवाओं सहित समाज के अन्य वर्गों की भागीदारी बढ़ सकती है। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि पुलिस मस्जिदों में जाकर मुस्लिम समुदाय के लोगों से आंदोलन में शामिल नहीं होने की अपील कर रही है।

            विपक्षी दलों का कहना है कि मतदाता सूची और मतदान प्रक्रिया से संबंधित कथित अनियमितताओं पर जवाबदेही तय होना जरूरी है। वहीं, मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर इंडिया ब्लॉक के नेताओं ने आंदोलन जारी रखने का संकेत दिया है। अब इस राजनीतिक टकराव के बीच राष्ट्रपति से मुलाकात और विपक्ष के प्रस्तावित मार्च पर सबकी नजरें टिकी हैं।