रायपुर, 9 अक्टूबर। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने प्रदेश में बिजली संकट को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के कुप्रबंधन और लापरवाही के कारण बिजली की पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो पा रही है। कभी दूसरे राज्यों को बिजली बेचने वाला छत्तीसगढ़ अब बाहर से बिजली खरीदने को मजबूर है।
श्री बैज ने आज यहां जारी बयान में कहा कि भाजपा सरकार बनने के बाद बिजली व्यवस्था चरमरा गई है। प्रदेश के कई जिलों में रोजाना घंटों बिजली कटौती हो रही है। रात के समय भी बिजली गुल रहने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सरकार निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में नाकाम है, वहीं उपभोक्ताओं पर महंगी बिजली का बोझ लगातार बढ़ाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में छत्तीसगढ़ से उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, झारखंड और ओडिशा जैसे राज्यों को बिजली की आपूर्ति की जाती थी। उस समय बिजली व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाने, नए ट्रांसफार्मर लगाने और ट्रांसमिशन व्यवस्था को उन्नत करने के कदम उठाए गए थे। इसके बावजूद भाजपा सरकार के पौने तीन साल के कार्यकाल में बिजली व्यवस्था बदहाल हो गई है। बिजली कटौती से परेशान लोग विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर हैं।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने बिजली दरों में बढ़ोतरी को लेकर भी सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि जुलाई से घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली दरों में 30 से 50 पैसे प्रति यूनिट और गैर-घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 20 से 40 पैसे प्रति यूनिट तक की वृद्धि की गई है। कृषि पंपों की बिजली दरों में भी 40 पैसे की बढ़ोतरी का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में पांच बार बिजली की दरें बढ़ाई जा चुकी हैं।
श्री बैज ने दावा किया कि विद्युत ईंधन अधिभार (एमपीपीएस) के रूप में 12 प्रतिशत की वृद्धि सहित अब तक बिजली की दरों में कुल 31.23 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा कि बढ़ते बिजली बिलों से आम उपभोक्ताओं का बजट बिगड़ रहा है। इसके विपरीत, कांग्रेस सरकार के पांच साल के कार्यकाल में बिजली दरों में केवल दो पैसे की बढ़ोतरी हुई थी और 400 यूनिट तक बिजली बिल हाफ योजना लागू थी।
उन्होंने स्मार्ट मीटर को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। बैज के अनुसार, स्मार्ट मीटर की रीडिंग और अधिक बिजली बिलों से उपभोक्ता परेशान हैं। कांग्रेस कार्यकर्ता स्मार्ट मीटर बदलने की मांग से जुड़े आवेदन लेकर घर-घर जा रहे हैं और लोग स्वेच्छा से आवेदन भर रहे हैं।




