(सन्तोष यादव)
सुलतानपुर, 22 अक्टूबर। असफलता अगर हौसला तोड़ने के बजाय अपनी कमियों को पहचानने का सबक बन जाए, तो कामयाबी की राह आसान हो जाती है। धनपतगंज ब्लॉक के इटवा मलनापुर गांव निवासी आयुष यादव की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। अग्निवीर और बिहार पुलिस की शारीरिक दक्षता परीक्षा में बार-बार मिली असफलता के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। अपनी कमजोरियों को पहचाना, तैयारी की रणनीति बदली और दौड़ को अपनी दिनचर्या का अहम हिस्सा बना लिया। उनकी इसी मेहनत और लगन का परिणाम है कि अब वह यूपी पुलिस में सेवा देंगे।
आयुष ने वर्ष 2023, 2024 और 2025 में लगातार अग्निवीर की परीक्षा पास की, लेकिन दौड़ में सफल नहीं हो सके। वर्ष 2025 में बिहार पुलिस की परीक्षा में भी उन्होंने सफलता हासिल की, मगर शारीरिक दक्षता परीक्षा में एक बार फिर चूक गए। लगातार मिल रही असफलताओं ने उन्हें अपनी तैयारी के तरीके पर नए सिरे से विचार करने के लिए प्रेरित किया।
इसके बाद आयुष ने अपनी दिनचर्या में बड़ा बदलाव किया। जनवरी 2026 से उन्होंने भोर में करीब तीन बजे उठकर दौड़ का नियमित अभ्यास शुरू कर दिया। वह घर से निकलकर पूर्वांचल एक्सप्रेसवे की सर्विस लेन पर दौड़ लगाते और फिर लौटकर लाइब्रेरी में पढ़ाई करते थे। दौड़ के अभ्यास और पढ़ाई के बीच तालमेल बनाए रखने के लिए वह प्रतिदिन करीब 40 किलोमीटर साइकिल भी चलाते थे।
आयुष की तैयारी केवल यूपी पुलिस की भर्ती तक सीमित नहीं रही। वर्ष 2026 में उन्होंने दिल्ली पुलिस की लिखित और शारीरिक दक्षता परीक्षा भी पास की है, जिसका परिणाम अभी प्रतीक्षित है। लेखपाल भर्ती की प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा में भी वह सफल रहे हैं। इसके अलावा एसएससी जीडी की लिखित परीक्षा पास कर चुके हैं।
लोअर पीसीएस की प्रारंभिक परीक्षा में सफलता के बाद उन्हें मुख्य परीक्षा में शामिल होने का अवसर मिला, लेकिन उसी तारीख को दिल्ली पुलिस की शारीरिक दक्षता परीक्षा होने के कारण वह लोअर पीसीएस की मुख्य परीक्षा में शामिल नहीं हो सके।
अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के बीच आयुष ने यूपी पुलिस की शारीरिक दक्षता परीक्षा पर विशेष ध्यान केंद्रित किया। लगातार अभ्यास, अनुशासित दिनचर्या और अपनी कमजोरियों को दूर करने के प्रयासों ने उन्हें सफलता की राह पर आगे बढ़ाया।
आयुष यादव एक मध्यमवर्गीय किसान परिवार से आते हैं। उनके पिता शेर बहादुर यादव किसान हैं, जबकि मां गृहिणी हैं। उनके बाबा रघुनाथ यादव गांव के प्रधान रह चुके हैं। दो भाइयों और एक बहन में आयुष दूसरे नंबर पर हैं।उनकी प्रारंभिक से लेकर इंटरमीडिएट तक की शिक्षा गांव के निकट सरैया मझौवा स्थित केवलापति स्मारक जूनियर हाईस्कूल और राम नरेश स्मारक इंटर कॉलेज में हुई। आयुष की सफलता से परिवार और गांव में खुशी का माहौल है। उनकी उपलब्धि पर विद्यालय की प्रबंधक मंजू सिंह और अध्यक्ष संजय सिंह ने उन्हें सम्मानित किया।
आयुष की सफलता इस बात की मिसाल है कि किसी लक्ष्य को हासिल करने के लिए केवल मेहनत ही नहीं, बल्कि अपनी कमियों को स्वीकार कर उन्हें दूर करने का धैर्य भी जरूरी है। बार-बार असफल होने के बावजूद उन्होंने प्रयास जारी रखा और अपनी तैयारी को नई दिशा दी। किसान परिवार से निकलकर यूपी पुलिस में सेवा देने की उनकी उपलब्धि उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो प्रतियोगी परीक्षाओं में असफलताओं के बावजूद अपने सपनों को साकार करने का प्रयास कर रहे हैं।




