रायपुर, 22 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने धान खरीदी में देरी, पटवारियों की हड़ताल, महतारी वंदन योजना के तहत महिलाओं से राशि की वसूली, पीएससी परीक्षा में कथित गड़बड़ी और बीटीआई ग्राउंड में व्यावसायिक एवं आवासीय परियोजना बनाने के प्रस्ताव को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों से किसान, गरीब, मजदूर और महिलाएं परेशान हैं। उन्होंने दीपावली से पहले धान खरीदी शुरू करने तथा किसानों को 3,358 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान करने की मांग की।
अपने निवास पर पत्रकारों से बातचीत में श्री बघेल ने कहा कि सरकार ने अब तक धान खरीदी की तारीख घोषित नहीं की है, जबकि दीपावली नजदीक है। किसान धान बेचकर मिलने वाली राशि से ही त्योहार की तैयारियां करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार नहीं चाहती कि किसान और गरीब परिवार दीपावली मना सकें।
श्री बघेल ने कहा कि पिछली व्यवस्था में एक नवंबर को राज्योत्सव के आसपास धान खरीदी शुरू हो जाती थी, ताकि किसानों को त्योहार से पहले भुगतान मिल सके। इस बार न खरीदी की तारीख तय हुई है और न ही बारदाने तथा खरीदी केंद्रों की तैयारियां नजर आ रही हैं। उन्होंने मांग की कि दीपावली से पहले धान खरीदी शुरू की जाए। यदि ऐसा संभव नहीं है तो किसानों को अग्रिम भुगतान किया जाए।
उन्होंने धान का भुगतान 3,358 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग करते हुए कहा कि भाजपा ने 3,100 रुपये प्रति क्विंटल देने का वादा किया था। उनके अनुसार, पिछले तीन वर्षों में समर्थन मूल्य में कुल 258 रुपये की वृद्धि हुई है। इसमें वर्ष 2024-25 में 117 रुपये, 2025-26 में 69 रुपये और 2026-27 में 72 रुपये की वृद्धि शामिल है। बघेल ने कहा कि भाजपा के घोषित वादे में समर्थन मूल्य की वृद्धि जोड़कर किसानों को 3,358 रुपये प्रति क्विंटल का भुगतान किया जाना चाहिए।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पिछले वर्ष का चावल भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) में जमा कराने का काम अब तक पूरा नहीं कर पाई है। उन्होंने सरकार के डीपीआर पोर्टल पर 25 सितंबर तक उपलब्ध आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि कुल 89 लाख टन चावल जमा करने का लक्ष्य है, जबकि 37.50 लाख टन चावल ही जमा हुआ है। शेष 51.50 लाख टन चावल जमा होना बाकी है।
श्री बघेल के मुताबिक, मीडिया रिपोर्टों में भी संग्रहण केंद्रों से धान का उठाव लंबित होने की बात सामने आई है। उन्होंने कहा कि मिलों में जगह की कमी और संग्रहण केंद्र खाली नहीं होने के कारण धान खरीदी में देरी की आशंका है। सरकार को पहले से लंबित चावल का उठाव और भंडारण की व्यवस्था दुरुस्त करनी चाहिए, ताकि नई खरीदी प्रभावित न हो।
श्री बघेल ने कहा कि धान खरीदी के लिए पंजीयन की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर निर्धारित है, लेकिन पटवारियों की हड़ताल के कारण किसानों के सामने मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। फौती, नामांतरण, बंटवारा और राजस्व रिकॉर्ड में त्रुटि सुधार जैसे काम प्रभावित होने से किसान तहसील कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं।
उन्होंने कहा कि पटवारी प्रतिवेदन नहीं मिलने के कारण तहसीलदार और एसडीएम कार्यालयों में राजस्व संबंधी प्रकरण लंबित हैं। यदि समय पर रिकॉर्ड दुरुस्त नहीं हुए तो कई किसान धान बेचने से वंचित हो सकते हैं।
श्री बघेल ने बताया कि पटवारी नए पीवी ऐप यानी फिजिकल वेरिफिकेशन ऐप में तकनीकी समस्याओं का विरोध कर रहे हैं। उनके अनुसार, ऐप में सर्वर डाउन रहने, लोकेशन मैच नहीं होने और खेतों में खड़ी फसल के भौतिक सत्यापन जैसी व्यावहारिक दिक्कतें आ रही हैं। उन्होंने सरकार से पटवारियों की समस्याओं का समाधान निकालने की मांग की, ताकि हड़ताल का असर धान खरीदी पर न पड़े।
महतारी वंदन योजना के तहत कथित रूप से अपात्र घोषित महिलाओं से पहले दी गई राशि की वसूली के मुद्दे पर श्री बघेल ने सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि महिलाओं को योजना का लाभ देने के बाद उनसे राशि वापस मांगना अन्यायपूर्ण है।श्री बघेल ने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने विवाहित महिलाओं को महतारी वंदन योजना का लाभ देने का वादा किया था, लेकिन सरकार बनने के बाद सरकारी नौकरी और आयकर से संबंधित शर्तें लागू कर दी गईं। अब राशि की वसूली की बात सामने आ रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं को हर महीने 1,000 रुपये देने का प्रचार करती है, जबकि बिजली की दरों में बढ़ोतरी से आम परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा है। उन्होंने शराब बिक्री से योजना की राशि जुटाने संबंधी मंत्रियों के बयानों पर भी सवाल उठाए।
श्री बघेल के अनुसार, पहले करीब 70 लाख महिलाओं को योजना का लाभ दिया जा रहा था, जबकि अब यह संख्या लगभग 68 लाख रह गई है। उन्होंने सरकार से महिलाओं पर एहसान जताने के बजाय उनकी आर्थिक स्थिति और समस्याओं को समझने की अपील की।
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (पीएससी) की वर्ष 2025 की मुख्य परीक्षा के मूल्यांकन पर सवाल उठाते हुए बघेल ने अभ्यर्थियों को उनकी उत्तरपुस्तिकाएं उपलब्ध कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि कुछ अभ्यर्थियों को मूल्यांकन में गड़बड़ी की आशंका है और वे अपनी कॉपियों का अवलोकन करना चाहते हैं।
श्री बघेल ने कहा कि मुख्य परीक्षा में 265 पदों के मुकाबले नियमानुसार 1:3 के अनुपात में 795 अभ्यर्थियों का साक्षात्कार के लिए चयन होना चाहिए था, लेकिन आयोग ने केवल 608 अभ्यर्थियों को ही योग्य माना। इस तरह 187 अभ्यर्थी कम चयनित हुए हैं।
उन्होंने आयोग के उस कथित स्पष्टीकरण का भी उल्लेख किया, जिसके अनुसार इन अभ्यर्थियों को निर्धारित न्यूनतम अंक नहीं मिले। बघेल ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए आयोग को अभ्यर्थियों की मांग पर उत्तरपुस्तिकाएं उपलब्ध करानी चाहिए, ताकि वे अपने अंकों का मूल्यांकन कर सकें और आयोग की विश्वसनीयता बनी रहे।
राजधानी रायपुर के बीटीआई ग्राउंड में व्यावसायिक और आवासीय परियोजना बनाए जाने की प्रस्तावित योजना पर भी बघेल ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि शहर में खुले मैदान पहले ही कम हैं और बीटीआई ग्राउंड लोगों के लिए महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थान है। यहां लोग सुबह-शाम सैर करते हैं तथा सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।




