नई दिल्ली, 24 अक्टूबर। दिल्ली में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) और चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शनों के मामले में छात्र नेता नेहा बोरा ने पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया है। दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा उनकी याचिका खारिज किए जाने के बाद उन्होंने कहा कि वह और उनका संगठन बॉन्ड पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे।
नेहा बोरा को 16 अक्टूबर को हिरासत में लिए जाने के बाद भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 के तहत 10 हजार रुपये का पीस बॉन्ड भरने के संबंध में कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। उन्होंने दिल्ली पुलिस के स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) के इस नोटिस को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की एकल पीठ ने उनकी याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि मंडी हाउस जैसे व्यस्त और संवेदनशील इलाके में निषेधाज्ञा लागू रहने के दौरान भीड़ जुटाने के प्रयास को देखते हुए शांति भंग होने की आशंका जताने के पर्याप्त आधार थे।
हालांकि, कोर्ट ने निर्देश दिया कि नोटिस जारी करने के आधार बने सभी खुफिया इनपुट, रिपोर्ट और संबंधित सामग्री याचिकाकर्ता को उपलब्ध कराई जाए।
फैसले के बाद नेहा बोरा ने कहा कि पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर नहीं किए जाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन शांति व्यवस्था के नाम पर नागरिकों के अभिव्यक्ति, शांतिपूर्ण सभा और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने के संवैधानिक अधिकारों को सीमित करना चाहता है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि छात्र और नागरिक जब चुनाव आयोग या सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हैं, तो पुलिस निवारक कानूनी प्रावधानों का इस्तेमाल कर उन्हें अपराधियों की तरह पेश करने की कोशिश करती है।
गौरतलब है कि BNSS, 2023 की धारा 126 के तहत शांति भंग की आशंका होने पर संबंधित व्यक्ति से शांति बनाए रखने के लिए बॉन्ड भरने की मांग की जा सकती है। धारा 136 संबंधित कार्यवाही में शांति बनाए रखने के लिए सुरक्षा देने के आदेश से जुड़ी है।




