रायपुर, 25 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ के पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता मोहम्मद अकबर ने वर्ष 2023 से अब तक मतदाताओं की संख्या में लगभग 24 लाख 99 हजार की कमी होने पर सवाल उठाते हुए भारत निर्वाचन आयोग से पूरे मामले में स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मतदाताओं के नाम हटाने के लिए इस्तेमाल किए गए फॉर्म-7 की प्रक्रिया की जांच कराने की भी मांग की है।
दस्तावेजों के आधार पर जारी बयान में मोहम्मद अकबर ने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ में एसआईआर के दौरान बड़े पैमाने पर फॉर्म-7 का दुरुपयोग कर मतदाताओं के नाम कटवाए गए हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 के बाद आबादी में वृद्धि होने के बावजूद मतदाताओं की संख्या में इतनी बड़ी गिरावट कई सवाल खड़े करती है। निर्वाचन आयोग को स्पष्ट करना चाहिए कि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया में निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पूरी तरह पालन किया गया है या नहीं।
श्री अकबर ने कहा कि मतदाता सूची से किसी व्यक्ति का नाम हटाने के लिए केवल फॉर्म-7 दाखिल कर देना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि नियमानुसार आपत्ति पर सुनवाई के दौरान आपत्तिकर्ता को नोटिस जारी कर व्यक्तिगत रूप से सुनना और उसका बयान दर्ज करना चाहिए। संबंधित अधिकारी को आपत्ति की वैधता के संबंध में स्वयं संतुष्ट होना चाहिए। साथ ही, जिस मतदाता के नाम पर आपत्ति की गई है, उसे भी आदेश पारित करने से पहले अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाना चाहिए।
पूर्व मंत्री ने कहा कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम मनमाने ढंग से मतदाता सूची से न हटाया जाए। यदि किसी व्यक्ति ने जानबूझकर गलत जानकारी या झूठी घोषणा देकर किसी मतदाता का नाम कटवाने का प्रयास किया है, तो उसके विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
उन्होंने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 का उल्लेख करते हुए कहा कि मतदाता सूची से संबंधित गलत घोषणा के मामलों में दोषी पाए जाने पर एक वर्ष तक के कारावास, जुर्माने अथवा दोनों का प्रावधान है। उन्होंने निर्वाचन आयोग से पूछा कि क्या फॉर्म-7 के माध्यम से की गई आपत्तियों की जांच में इन प्रावधानों को ध्यान में रखा गया है और क्या गलत शिकायतें करने वालों के विरुद्ध कोई कार्रवाई की गई है।
मोहम्मद अकबर ने अपने बयान में प्रदेश के 33 जिलों में कुल 1,08,807 मतदाताओं के नाम काटे जाने का उल्लेख किया। उनके अनुसार, रायपुर जिले में 31,028, कोरबा में 15,187, कबीरधाम में 2,234, बालोद में 3,903, बलौदाबाजार-भाटापारा में 2,662 और दुर्ग जिले में 7,209 मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं।
उन्होंने निर्वाचन आयोग से इन आंकड़ों का जिलेवार विवरण सार्वजनिक करने और यह स्पष्ट करने की मांग की कि हटाए गए नामों में से कितने मामले फॉर्म-7 के आधार पर हुई आपत्तियों से संबंधित हैं।
पूर्व मंत्री ने सवाल उठाया कि फॉर्म-7 के माध्यम से आपत्ति दर्ज कराने वाले कितने लोगों के बयान लिए गए? जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए, उनमें से कितने लोगों को सुनवाई का अवसर दिया गया? कितने मामलों में शिकायतें गलत पाई गईं और कितने मामलों में आपत्तिकर्ताओं द्वारा दी गई जानकारी फर्जी या भ्रामक साबित हुई?
उन्होंने यह भी पूछा कि यदि जांच में झूठी शिकायतें सामने आई हैं, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 31 के तहत कितने मामलों में कार्रवाई की गई है। उनके मुताबिक, निर्वाचन आयोग को इन सभी सवालों के तथ्यात्मक जवाब सार्वजनिक करने चाहिए, ताकि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर बनी आशंकाएं दूर हो सकें।
मोहम्मद अकबर ने वर्ष 2023 से अब तक आबादी में वृद्धि और मतदाताओं की संख्या में कथित कमी के बीच के अंतर पर विशेष सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जब इस अवधि में राज्य की आबादी बढ़ी है, तो मतदाताओं की संख्या में लगभग 24 लाख 99 हजार की कमी कैसे हो गई? निर्वाचन आयोग को इस अंतर के कारणों का स्पष्ट और विस्तृत ब्यौरा देना चाहिए।
उन्होंने छत्तीसगढ़ में कांग्रेस और भाजपा के बीच जीत-हार के अंतर का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों दलों के बीच चुनावी अंतर 6 लाख 32 हजार वोटों का बताया जाता है, जबकि मतदाताओं की संख्या में कमी इससे लगभग चार गुना अधिक है। उनके अनुसार, यह स्थिति गंभीर सवाल खड़े करती है और इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।
अकबर ने मांग की कि निर्वाचन आयोग मतदाता सूची में हुई कमी के कारणों, नाम हटाने की प्रक्रिया और फॉर्म-7 के तहत प्राप्त आपत्तियों से संबंधित आंकड़ों को सार्वजनिक करे। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता से ही मतदाताओं का भरोसा कायम रखा जा सकता है।




