रायपुर, 03 नवंबर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ की खनिज संपदा देश के औद्योगिक एवं आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। राज्य सरकार का लक्ष्य खनिज संसाधनों का वैज्ञानिक और जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग सुनिश्चित करने के साथ इसका लाभ स्थानीय लोगों, विशेषकर खनन प्रभावित क्षेत्रों और जनजातीय समुदायों तक पहुंचाना है। खनिज प्रबंधन, निवेश और रोजगार सृजन के माध्यम से छत्तीसगढ़ को देश का प्रमुख ग्रोथ इंजन बनाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।
श्री साय आज रायपुर स्थित अपने निवास कार्यालय में केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी की उपस्थिति में आयोजित खनन एवं कोयला क्षेत्र की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को पूरा करने में छत्तीसगढ़ की महत्वपूर्ण भूमिका है। खनन गतिविधियों के विस्तार के साथ पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय रोजगार और प्रभावित समुदायों के हितों को प्राथमिकता देना भी आवश्यक है। विकास का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब खनिज संपदा से होने वाले आर्थिक लाभ का हिस्सा प्रभावित लोगों तक पहुंचे।
मुख्यमंत्री ने खनिज प्रशासन में पारदर्शिता और आधुनिक तकनीक के उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि खनिज ऑनलाइन 2.0 पोर्टल, डिजिटल निगरानी और ड्रोन तकनीक से खनन गतिविधियों की निगरानी प्रभावी बनाई जा रही है। वहीं, बस्तर के जनजातीय समुदायों को टिन अयस्क का उचित मूल्य दिलाने और खरीदी एवं भुगतान में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए TIN पोर्टल शुरू किया गया है। इसका उद्देश्य स्थानीय समुदायों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है।
केंद्रीय मंत्री श्री रेड्डी ने छत्तीसगढ़ सरकार की खनन क्षेत्र में तकनीक आधारित पहल, प्रशासनिक सुधारों और राजस्व वृद्धि के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने विशेष रूप से खनिज ऑनलाइन 2.0 पोर्टल, ड्रोन आधारित मॉनिटरिंग, खनन गतिविधियों की स्टार रेटिंग और TIN पोर्टल को महत्वपूर्ण नवाचार बताया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ने खनिज संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और पारदर्शिता के लिए उल्लेखनीय कार्य किए हैं। इन पहलों को और प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।
श्री रेड्डी ने खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) की राशि का अधिकतम और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि डीएमएफ का मूल उद्देश्य खनन प्रभावित और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के जीवन स्तर में सुधार करना है। इसके लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, आजीविका, सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने नक्सल प्रभावित रहे जिलों को डीएमएफ राशि के उपयोग में नियमों के तहत दी गई विशेष छूट का अधिकतम लाभ उठाने की भी बात कही।
केंद्रीय मंत्री ने प्रदेश में नए खनिज भंडारों की खोज और अन्वेषण कार्यों में तेजी लाने की आवश्यकता जताई। उन्होंने पारंपरिक खनिजों के साथ क्रिटिकल एवं रणनीतिक खनिजों के अन्वेषण पर विशेष ध्यान देने तथा आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों और केंद्र सरकार से उपलब्ध बजट का अधिकतम उपयोग करने को कहा। साथ ही खनिज ब्लॉकों की नीलामी के बाद उन्हें शीघ्र उत्पादन में लाने के लिए आवश्यक वैधानिक स्वीकृतियों और प्रक्रियाओं में तेजी लाने पर बल दिया।




