
जगदलपुर, 08 नवम्बर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को छत्तीसगढ़ के बस्तर में सुरक्षा बलों के जवानों के साथ दीपावली मनाई। इस दौरान जवानों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि देश ने नक्सलवाद और माओवादी आतंक के खिलाफ दशकों पुरानी लड़ाई में ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। हालांकि, उन्होंने आगाह किया कि खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। जंगलों से हथियारबंद नक्सली भले ही समाप्त हो गए हों, लेकिन ‘दिमागी नक्सलियों’ से अभी सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे तत्व कई राजनीतिक दलों और अलग-अलग संगठनों में घुसपैठ कर चुके हैं और आज भी संविधान तथा लोकतंत्र के खिलाफ लोगों को उकसा रहे हैं। इन्हें पहचानना और परास्त करना जरूरी है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह पहली दीपावली है, जब देश नक्सलवाद के भय से मुक्त हुआ है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि का सबसे बड़ा श्रेय सुरक्षा बलों के जवानों के त्याग, तपस्या और अदम्य साहस को जाता है। सीमा पर और देश के भीतर राष्ट्र की रक्षा में तैनात जवान उनके परिवार का हिस्सा हैं। उन्होंने सीआरपीएफ, कोबरा, बीएसएफ, आईटीबीपी, एसएसबी, राज्य पुलिस, बस्तर फाइटर्स और महिला कमांडो सहित सभी सुरक्षा कर्मियों को देश की ओर से नमन किया।
श्री मोदी ने कहा कि एक समय देश के करीब 20 राज्यों के 230 से अधिक जिले नक्सलवाद से प्रभावित थे। हजारों गांवों में शाम होते ही जनजीवन ठहर जाता था और नक्सलियों ने लोगों से मतदान का अधिकार तक छीन लिया था। वर्ष 2010 में दंतेवाड़ा में नक्सली हमले में सीआरपीएफ के 76 जवान शहीद हुए थे, जबकि एक अन्य घटना में 44 निर्दोष नागरिकों की हत्या कर दी गई थी। छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ संघर्ष में एक हजार से अधिक जवानों ने बलिदान दिया।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 के बाद नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई की रणनीति बदली गई। सुरक्षा बलों को आवश्यक फैसले लेने की स्वतंत्रता दी गई और नक्सलियों की फंडिंग, हथियारों की आपूर्ति तथा नेटवर्क पर प्रहार किया गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले एक वर्ष में ड्यूटी के दौरान सीआरपीएफ का एक भी जवान शहीद नहीं हुआ। यह सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति, प्रभावी नीतियों और जवानों के शौर्य की जीत है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई के साथ प्रभावित क्षेत्रों के विकास को भी प्राथमिकता दी गई। नक्सली स्कूल, अस्पताल, सड़क, मोबाइल टावर और रेलवे जैसी बुनियादी सुविधाओं को निशाना बनाते थे, जिससे आदिवासी और गरीब परिवार विकास से वंचित रह जाते थे। इसे बदलने के लिए नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में 15 हजार किलोमीटर से अधिक सड़कें बनाई गईं, करीब 9,500 मोबाइल टावर लगाए गए तथा लगभग 175 एकलव्य विद्यालय, 50 आईटीआई और करीब 50 कौशल विकास केंद्र स्थापित किए गए। हजारों डाकघर, बैंक शाखाएं और एटीएम भी खोले गए। पीएम जनमन योजना के माध्यम से दूरस्थ आदिवासी गांवों तक सड़क, बिजली और पानी जैसी सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं।
श्री मोदी ने कहा कि नक्सलवाद और गरीबी के खिलाफ लड़ाई एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने विश्व बैंक की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत के 50 करोड़ लोग भीषण गरीबी से बाहर आए हैं। जनधन, प्रधानमंत्री आवास, मुद्रा, आयुष्मान भारत, पीएम स्वनिधि, मुफ्त राशन, स्वच्छ भारत और हर घर जल जैसी योजनाओं ने गरीबों के जीवन में बड़ा बदलाव किया है।
बस्तर में आए बदलाव का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि आज यहां बस्तर ओलंपिक का आयोजन हो रहा है। बच्चे अब बंदूक नहीं, बल्कि खेल के मैदान में अपनी प्रतिभा दिखा रहे हैं। उन्होंने नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में स्थानीय नागरिकों के सहयोग की भी सराहना की और आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास के प्रयासों का उल्लेख किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ मिली सफलता देश की नई उड़ान का आधार है। अब गरीबी मुक्त, नशामुक्त, आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण का संकल्प पूरा करना है। उन्होंने जवानों के त्याग और परिश्रम को विकसित भारत की मजबूत नींव बताते हुए सभी सुरक्षा कर्मियों को दीपावली की शुभकामनाएं दीं।



