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बिहार: पीएम मोदी ने सम्राट चौधरी पर कसा तंज…

महागठबंधन की महारैली से पहले पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव पलटवार किया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि परिवारवाद की बात पीएम मोदी राजद के लिए नहीं, बल्कि इनके लिए कह रहे थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार में दो जनसभाएं की। औरंगाबाद और बेगूसराय में अपने संबोधन के दौरान उन्होंने परिवारवाद के मुद्दे पर लालू परिवार और राहुल गांधी पर जमकर हमला बोला था। महागठबंधन की महारैली से पहले पूर्व उपमुख्यमंत्री और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के छोटे बेटे तेजस्वी यादव पलटवार किया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि परिवारवाद की बात पीएम मोदी राजद के लिए नहीं कह रहे थे, बल्कि उनके बगल में बैठे भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और नए डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के लिए कह रहे थे। इसमें कोई चिंता की बात नहीं है। सबसे ज्यादा परिवारवाद भाजपा में ही है। जनता भी यह बात जनती है।

सीएम नीतीश कुमार पर भी हमला बोला
इतना ही नहीं तेजस्वी यादव ने सीएम नीतीश कुमार पर भी हमला बोला। कहा कि कम से कम इस बाद मुख्यमंत्री अपनी बात पर कायम रहें। वह पाला नहीं बदलें, हम सबकी यही कामना है। दरअसल, औरंगाबाद और बेगूसराय में सीएम नीतीश ने कहा था कि हम बीच में इधर-उधर चले गए थे, अब एनडीए में हमेशा के लिए आ गए हैं। अब हम कहीं नहीं जाएंगे। भाजपा के साथ ही रहेंगे।

अब जानिए पीएम मोदी ने क्या कहा था
पीएम मोदी ने कहा कि साथियों बिहार ने दशकों तक परिवारवाद का नुकसान देखा है। परिवारवाद का दंश झेला है। परिवारवाद और सामाजिक न्याय यह एक-दूसरे के घोर विरोधी हैं। दूसरी तरफ राजद और कांग्रेस की घोर परिवारवादी कुरीति है। राजद और कांग्रेस के लोग अपने परिवारवाद और भ्रष्टाचार को उचित ठहराने के लिए दलित, वंचित और पिछड़ों को ढाल बनाते हैं। यह सामाजिक न्याय नहीं। बल्कि समाज के साथ विश्वासघात है। वरना क्या कारण है कि सिर्फ एक ही परिवार का सशक्तिकरण हुआ और समाज के बाकी परिवार पीछे रह गए। किस तरह एक परिवार के लिए युवाओं को नौकरी के नाम पर उनकी जमीनों को कब्जा किया गया, यह भी देश ने देखा है। साथियों, सच्चा सामाजिक न्याय तुष्टिकरण से नहीं संतुष्टिकरण से आता है।

तेजस्वी यादव पर हमला बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा था कि परिवारवादी राजनीति की एक और विडंबना है कि मां-बाप से विरासत में पार्टी और कुर्सी तो मिल जाती है लेकिन मां-बाप की सरकारों के काम-काज का एक बार भी जिक्र करने की हिम्मत नहीं होती है। यह परिवादी पार्टी की हालत है।