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बंगाल के राज्यपाल ने शांतिपूर्ण मतदान के लिए कालीघाट मंदिर में की प्रार्थना

राज्यपाल ने दावा किया कि उन्होंने कूचबिहार जाने का फैसला इसलिए किया था, क्योंकि वह मतदान के दिन लोगों के साथ रहना चाहते थे, लेकिन उन्होंने देखा कि उनके इरादे का राजनीतिकरण किया जा रहा है।

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल डॉ. सीवी आनंद बोस ने शुक्रवार सुबह कोलकाता के प्रसिद्ध कालीघाट मंदिर में पहुंचकर उत्तर बंगाल की तीन लोकसभा सीटों पर हो रहे चुनाव में शांतिपूर्ण मतदान के लिए प्रार्थना की। इसके बाद राज्यपाल राजभवन में खोले गए पीस रूम (शांति कक्ष) में बैठकर सुबह से ही तीनों लोकसभा क्षेत्रों कूचबिहार, जलपाईगुड़ी और अलीपुरद्वार के घटनाक्रम पर नजर रख रहे हैं।

कालीघाट मंदिर से निकलते समय राज्यपाल ने पत्रकारों से कहा कि वे आज पूरे दिन भर पीस रूम में ही रहेंगे और घटनाक्रम पर नज़र रखेंगे। मैं पीस रूम में लोगों के लिए ईमेल और टेलीफोन पर चौबीसों घंटे उपलब्ध हूं। राजभवन के पीस रूम को इन तीनों क्षेत्रों से छिटपुट हिंसा, मतदान में बाधा, धमकियां आदि संबंधी लगातार शिकायतें भी मिल रही है।

राजभवन के अधिकारी ने बताया कि पीस रूम को इन तीनों क्षेत्रों से सुबह 10 बजे तक 100 से अधिक शिकायतें मिल चुकी है। दरअसल, राज्य में चुनावी हिंसा को देखते हुए मतदाताओं में विश्वास जगाने के लिए राज्यपाल ने मतदान के दिन कूचबिहार में डेरा डालने की योजना बनाई थी, क्योंकि इस निर्वाचन क्षेत्र में पिछले विधानसभा और पंचायत चुनावों में हिंसा के सबसे ज्यादा मामले सामने आए थे।

हालांकि, चुनाव आयोग ने बुधवार को राज्यपाल को मतदान के दिन वहां के दौरे पर नहीं जाने की सलाह दी थी, जिसके बाद राज्यपाल ने कूचबिहार के दौरे को टाल दिया और राजभवन से ही नजर रख रहे हैं। आयोग ने उन्हें ईमेल भेजकर कहा था कि मतदान के दिन उनकी यात्रा से आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन होगा।सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने भी आयोग में राज्यपाल के खिलाफ एक शिकायत दर्ज की थी कि कूचबिहार में चुनाव में हस्तक्षेप करने और प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है।

राज्यपाल ने दावा किया कि उन्होंने कूचबिहार जाने का फैसला इसलिए किया था, क्योंकि वह मतदान के दिन लोगों के साथ रहना चाहते थे, लेकिन उन्होंने देखा कि उनके इरादे का राजनीतिकरण किया जा रहा है। मेरा ध्यान राज्य में हिंसा के खिलाफ लड़ना है, खासकर चुनाव के दौरान। इसीलिए मैं कूचबिहार जाना चाहता था, लेकिन इसका राजनीतिकरण करने का प्रयास किया गया। वह नहीं चाहते कि उनके पद की गरिमा को ठेस पहुंचे और कोई भी उन्हें किसी भी राजनीतिक खेल में मोहरे की तरह व्यवहार करे। इसलिए उन्होंने अपना उत्तर बंगाल दौरा रद करने का फैसला किया।

हिंसा के खिलाफ मुखर हैं राज्यपाल
बता दें कि 16 मार्च को, जिस दिन चुनाव आयोग ने पूरे देश में लोकसभा चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की थी, उसी समय राज्यपाल ने कहा था कि वह पहले दिन से ही मतदान के दिन सड़क पर रहेंगे। मैं सुबह छह बजे सड़कों पर उतरूंगा। मैं लोगों के लिए उपलब्ध रहूंगा। पिछले साल पंचायत चुनावों में हुई मानव रक्त की राजनीतिक होली को अब अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।