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अश्विन रामास्वामी ने जॉर्जिया प्रांत में जीता डेमोक्रेटिक प्राइमरी चुनाव

रामास्वामी ने कहा कि मैं नवंबर में रिपब्लिकन सीनेटर शॉन स्टिल का सामना करूंगा। अगर रामास्वामी चुनाव जीतते हैं, तो वे जॉर्जिया राज्य के अब तक के सबसे कम उम्र के निर्वाचित प्रतिनिधि होंगे।

अमेरिका में इस साल आम चुनाव होने वाले हैं। जेन जेड भारतवंशी अश्विन रामास्वामी ने जॉर्जिया प्रांत में डेमोक्रेटिक प्राइमरी चुनाव जीत लिया है। हालांकि, भारतंवशी कांग्रेसी प्रमिला जयपाल की बहन सुशीला जयपाल ओरेगॉन राज्य में अपनी कांग्रेस की प्राइमरी दावेदारी हार गई हैं।

रामास्वामी को समुदाय के नए उभरते नेता के रूप में देखा जा रहा है
रामास्वामी ने कहा कि मैं नवंबर में रिपब्लिकन सीनेटर शॉन स्टिल का सामना करूंगा। इसे जॉर्जिया का सबसे अस्थिर सीनेट सीट माना जाता है। अगर रामास्वामी चुनाव जीतते हैं, तो वे जॉर्जिया राज्य के अब तक के सबसे कम उम्र के निर्वाचित प्रतिनिधि होंगे। रामास्वामी को समुदाय के नए उभरते नेता के रूप में देखा जा रहा है। रामास्वामी के माता-पिता साल 1990 में तमिलनाडु से अमेरिका में आकर बस गए थे। जेन-जेड सोशल मीडिया से चर्चाओं में आया एक शब्द हैं, जिसका अर्थ है 1997 से 2012 के बीच जन्मा बालक या बालिका। रामास्वामी चुनाव से पहले सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग, चुनाव सुरक्षा और प्रौद्योगिकी कानून और नीति अनुसंधान में अपना करियर बना चुके हैं।

उपनिषद पढ़ने में रुचि है, गीता-रामायण पढ़ चुका
एक बार पहले, रामास्वामी ने कहा था कि मेरे माता-पिता दोनों 1990 के दशक में अमेरिका आए थे। मेरी मां चेन्नई से हैं, मेरे पिता कोयंबटूर से हैं। मैं भारतीय और अमेरिकी संस्कृति के साथ बड़ा हुआ हूं। मैं एक हिंदू हूं। मुझे अपने पूरे जीवन में भारतीय संस्कृति दर्शन में बहुत रुचि रही है। मैं जब बड़ा हुआ तो चिन्मय मिशन बालाविहार गया, यहां मैंने रामायण, महाभारत और भगवदगीता जैसे महाकाव्यों को सीखा। जब मैं कॉलेज में था तो मैंने संस्कृत सीखी। मैंने सारे प्राचीन ग्रंथ पढ़े हैं। उपनिषद पढ़ने में मेरी बहुत रुचि हो गई। मेरा पूरा जीवन योग और ध्यान में रहा। अब यह ज्ञान में नए युवाओं तक पहुंचा रहा हूं।

सुशीला को डेक्सटर ने दी मात
वहीं, सुशीला जयपाल मैक्सिन डेक्सटर से प्राइमरी चुनाव हारी हैं। उन्होंने कहा कि मैंने फोन करके डेक्सटर को बधाई दी। मुझे अपने अभियान पर गर्व है। उनकी बहन प्रमिला ने कहा कि मुझे सुशीला पर गर्व है। हमें जो उम्मीद थी, उस अनुसार परिणाम नहीं मिले। उन्होंने अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया था। बता दें, सुशीला दो बच्चों की मां हैं। प्रजनन अधिकारों, शिक्षा और आर्थिक न्याय को लेकर सुशीला काफी मुखर रही हैं। वे एक समर्पित सामुदायिक वकील और स्वयंसेवक थीं, जो कई स्थानीय बोर्डों में कार्यरत थीं।