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ई-लोक अदालत एक नोबेल विचार और नोबेल पहल – मेनन

बिलासपुर 11 जुलाई।छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय एवं इसके साथ ही राज्य की सभी जिला अदालतों में कोरोना संक्रमण के दौर में पहली ई-लोक अदालत का आयोजन किया गया। देश की पहली बार ई-लोक अदालत का आयोजन हुआ।

उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पी.आर.रामचन्द्र मेनन ने आज देश की पहले ई-लोक अदालत का उद्घाटन करते हुए कहा कि नोवल कोरोना वायरस के इस कठिन दौर में न्यायालयों में लंबित प्रकरणों का निराकरण करने और पक्षकारों को राहत पहुंचाने के लिये ई-लोक अदालत एक नोबेल विचार और नोबेल पहल है।उन्होने कहा कि ई-लोक अदालत प्रदेश भर में लगाई गई।यह महत्वपूर्ण है।

उन्होने कहा कि लाकडाउन के कारण सभी गतिविधियों प्रभावित हुई हैं, इससे न्यायिक क्षेत्र भी अछूता नहीं रहा है। ऐसी स्थिति में ई-लोक अदालत एक प्रयास है कि हम मुकदमे से जुड़े लोगों की तकलीफों को कम कर सकें।राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यपालक अध्यक्ष जस्टिस प्रशांत मिश्रा ने कहा कि ये ऐतिहासिक मौका है जब वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश भर की अदालतों में समझौते कर मुकदमों का निपटारा गया।उन्होंने उच्चतम न्यायालय  के मुख्य न्यायाधीश और राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष का भी ई-लोक अदालत में सहयोग के लिये आभार जताया।

जस्टिस मिश्रा ने बताया कि ई-लोक अदालत निर्बाध रूप से चले, ये सुनिश्चित करने के लिये सभी जिलों की अदालतों को प्राधिकरण द्वारा अतिरिक्त डेटा उपलब्ध कराया गया। ई-लोक अदालत में 23 जिलों की 195 खंडपीठ में 3133 मामले सुने गए।उच्च न्यायलय में भी दो बेंच लगी।उन्होंने कहा कि यदि ई-लोक अदालत सफल होती है, तो भविष्य में ऐसी अदालतें और लगाई जायेंगी।

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