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तीन तलाक विधेयक को लोकसभा ने फिर किया पारित

नई दिल्ली 27 दिसम्बर।लोकसभा ने आज दूसरी बार ‘मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक को पारित कर दिया।

कांग्रेस ने इसके कुछ प्रावधानों का विरोध करते हुए इसे संयुक्त प्रवर समिति में भेजने की मांग की तो सत्तारूढ़ भाजपा ने इसे मुस्लिम महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए उठाया गया ऐतिहासिक कदम करार दिया। संशोधनों पर वोटिंग से पहले कांग्रेस और एआईएडीएमके ने सदन से वॉकआउट किया। इसके बाद सदन में वोटिंग हुई।

तीन तलाक विधेयक के पक्ष में 245 और 11 वोट पड़े। तीन तलाक में वोटिंग पर ओवैसी का प्रस्ताव गिरा। ओवैसी की तरफ से लाए गए प्रस्ताव को सदन से मंजूरी नहीं मिली। वोटिंग में ओवैसी के प्रस्ताव के समर्थन में 15 वोट पड़े जबकि 236 सांसदों ने प्रस्ताव का विरोध किया।

इस विधेयक में तीन बार तलाक एक साथ बोलकर तुरंत तलाक देने को अमान्‍य और अवैध करार दिया गया है। इसमें इस तरह से वैवाहिक संबंध तोड़ने को दंडनीय अपराध घोषित करने तथा इसके लिए तीन साल के कारावास का भी प्रावधान किया गया है। यह विधेयक 2018 में लागू किये गये मुस्लिम महिला वैवाहिक अधिकार संरक्षण अध्‍यादेश का स्‍थान लेगा।

विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए विधि और न्‍याय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि इसे किसी धर्म को ध्‍यान में रखकर नहीं लाया गया है, बल्कि इसका उद्देश्‍य महिलाओं को न्‍याय दिलाना है।श्री प्रसाद ने तीन तलाक के खिलाफ दंडात्‍मक प्रावधानों से संबंधित कांग्रेस और अन्‍य विपक्षी पार्टियों की आपत्तियों को लेकर सवाल किया। उन्‍होंने कहा कि किसी अपराध की रोकथाम के लिए सजा वाले प्रावधान होने जरूरी है। विधेयक को संसद की संयुक्‍त प्रवर समिति को भेजे जाने की मांग को श्री रविशंकर प्रसाद ने अस्‍वीकार कर दिया।

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