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हिंदी के विरोध में खुलकर आए राज ठाकरे

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के अध्यक्ष राज ठाकरे ने बुधवार को राज्य के स्कूली शिक्षा मंत्री दादाजी भुसे से अपील की कि वे जितनी जल्दी हो सके लिखित आदेश जारी करें जिसमें कहा जाए कि पहली कक्षा से केवल दो भाषाएं मराठी और अंग्रेजी पढ़ाई जाएंगी और हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में अनिवार्य नहीं बनाया जाएगा। और ऐसा नहीं होने पर उन्होंने आंदोलन की चेतावनी दी है।

तमिलनाडु में हिंदी तमिल विवाद के बाद अब महाराष्ट्र में मराठी हिंदी विवाद तेजी से बढ रहा है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के अध्यक्ष राज ठाकरे हिंदी के विरोध में खुलकर आ गए हैं और उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में केवल दो ही भाषा पढ़ाई जाएं मराठी और अंग्रेजी।

राज ठाकरे ने राज्य के स्कूली शिक्षा मंत्री से अपील की
राज ठाकरे ने बुधवार को राज्य के स्कूली शिक्षा मंत्री दादाजी भुसे से अपील की कि वे जितनी जल्दी हो सके लिखित आदेश जारी करें, जिसमें कहा जाए कि पहली कक्षा से केवल दो भाषाएं, मराठी और अंग्रेजी पढ़ाई जाएंगी और हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में अनिवार्य नहीं बनाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि हमें जानकारी है कि हिंदी सहित तीन भाषाएं पढ़ाने के पहले के निर्णय के आधार पर, हिंदी भाषा की पाठ्यपुस्तकों की छपाई पहले ही शुरू हो चुकी है। अब जबकि किताबें छप चुकी हैं, क्या सरकार अपने निर्णय से पीछे हटने की योजना बना रही है?

आंदोलन के लिए सरकार जिम्मेदार होगी- राज ठाकरे
मनसे प्रमुख ने कहा कि मुझे लगता है कि ऐसी कोई योजना नहीं है, लेकिन अगर ऐसा कुछ होता है, तो महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना द्वारा शुरू किए जाने वाले आंदोलन के लिए सरकार जिम्मेदार होगी । देश के कई राज्यों ने पहली कक्षा से ही दो भाषाओं को अपनाया है और हिंदी को थोपने को अस्वीकार किया है, इसका कारण उनकी भाषाई पहचान है।

राज ठाकरे ने कही ये बात
राज ठाकरे ने राज्य के स्कूली शिक्षा मंत्री दादाजी भुसे को संबोधित करते हुए कहा कि आपके साथी कैबिनेट सदस्य भी जन्म से मराठी हैं, आप हिंदी का विरोध करने वाले अन्य राज्यों के नेताओं की तरह कब काम करेंगे और कब अपनी भाषा की पहचान की रक्षा करेंगे और उसका पोषण कैसे करेंगे?

आगे बोले कि हम उम्मीद करते हैं कि सरकार उन अन्य राज्यों की तरह ही पहचान की भावना दिखाएगी। बता दें कि पिछले करीब दो महीने से महाराष्ट्र में पहली कक्षा से हिंदी भाषा की पढ़ाई शुरू करने को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

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