
रायपुर, 14 जनवरी।छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले के गोण्डा क्षेत्र में सक्रिय रहे 29 भटके युवाओं ने हिंसा और भटकाव का मार्ग त्यागकर समाज की मुख्यधारा से जुड़ने का संकल्प लिया है। यह कदम क्षेत्र में शांति, विश्वास और स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर कहा कि यह केवल आत्मसमर्पण नहीं, बल्कि उस भरोसे और सुरक्षा का प्रमाण है जो अब नक्सल प्रभावित अंचलों में लौट रहा है। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में कभी भय, दबाव और असुरक्षा का माहौल था, वहाँ आज सुरक्षा शिविरों की सशक्त मौजूदगी, प्रशासन की सक्रिय भूमिका और जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रभावी पहुँच से परिस्थितियाँ तेजी से बदल रही हैं।
उन्होने बताया कि सुकमा और आसपास के इलाकों में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, राशन, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाएँ आमजन के जीवन में वास्तविक परिवर्तन ला रही हैं। राज्य सरकार की स्पष्ट नीति है कि जो भी व्यक्ति हिंसा का रास्ता छोड़कर संविधान और विकास का मार्ग अपनाएगा, उसे सम्मानजनक जीवन, नए अवसर और सुरक्षित भविष्य प्रदान किया जाएगा।
श्री साय ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल हिंसा को समाप्त करना नहीं है, बल्कि भटके हुए युवाओं को समाज की मुख्यधारा में लौटाकर उन्हें नई पहचान और नया जीवन देना है। 29 युवाओं का मुख्यधारा में लौटना इस बात का प्रमाण है कि छत्तीसगढ़ के आदिवासी अंचलों में अब डर की जगह भरोसा और अंधेरे की जगह उम्मीद ने ले ली है।
उन्होंने यह भी कहा कि यह परिवर्तन केवल सुरक्षा अभियानों का परिणाम नहीं, बल्कि संवेदनशील शासन व्यवस्था, संवाद, विकास और पुनर्वास को प्राथमिकता देने वाली नीतियों का परिणाम है।
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