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साय ने गढ़बेंगाल घोटुल पहुंचकर बस्तर की लोक-संस्कृति और विरासत को किया नमन

नारायणपुर, 30 जनवरी।छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जिले के अपने दो दिवसीय प्रवास के दौरान आज गढ़बेंगाल स्थित घोटुल का भ्रमण कर बस्तर की समृद्ध आदिवासी परंपराओं, लोक-संस्कृति और गौरवशाली विरासत के प्रति अपनी गहरी प्रतिबद्धता व्यक्त की। पारंपरिक वाद्ययंत्रों की मधुर ध्वनि और ग्रामीणों के आत्मीय स्वागत के बीच मुख्यमंत्री स्वयं लोक-रंग में रंगे नजर आए।

  श्री साय ने घोटुल की अनूठी स्थापत्य कला का अवलोकन किया और बस्तर की विभूतियों से मुलाकात कर उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि घोटुल प्राचीन काल से ही आदिवासी समाज के लिए शिक्षा, संस्कार और सामाजिक जीवन का केंद्र रहा है। चेंदरू पार्क के समीप निर्मित यह आधुनिक घोटुल न केवल नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ेगा, बल्कि देश-दुनिया के पर्यटकों को भी आदिवासी जीवनशैली और सामाजिक व्यवस्था से परिचित कराने का सशक्त माध्यम बनेगा। गढ़बेंगाल का यह घोटुल हमारी गौरवशाली विरासत के संरक्षण का प्रतीक है।

मुख्यमंत्री ने घोटुल परिसर में युवाओं और युवतियों के लिए निर्मित लेय्योर एवं लेयोस्क कुरमा, साथ ही पारंपरिक वेशभूषा, प्राचीन वाद्ययंत्र और सांस्कृतिक सामग्रियों के संग्रह हेतु बनाए गए बिडार कुरमा का निरीक्षण किया। ग्रामीणों के आग्रह पर उन्होंने सगा कुरमा में बस्तर के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद लेकर स्थानीय खान-पान संस्कृति के प्रति सम्मान प्रकट किया।

मुख्यमंत्री को परोसे गए पारंपरिक व्यंजनों में गाटो-भात, कोदो-भात, उड़िद दाल, हिरुवा दाल, जीरा भाजी, कनकी पेज, घिरोल फूल भाजी, चाटी भाजी, कांदा भाजी, मुनगा भाजी, इमली आमट, मड़िया पेज, टमाटर चटनी, चिला रोटी, रागी कुरमा, रागी केक, रागी लड्डू और रागी जलेबी शामिल रहे।

इस अवसर पर वन मंत्री केदार कश्यप, राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ के अध्यक्ष रूपसाय सलाम, जिला पंचायत अध्यक्ष नारायण मरकाम, पद्मश्री  पंडीराम मंडावी, लोक कलाकार बुटलू राम एवं वरिष्ठ जनप्रतिनिधि श्रीमती संध्या पवार भी उपस्थित रहे और मुख्यमंत्री के साथ पारंपरिक व्यंजनों का आनंद लिया।

   श्री साय ने इस प्रवास को केवल औपचारिक दौरा न मानते हुए इसे आत्मीय मिलन का स्वरूप दिया। उन्होंने वैद्यराज पद्मश्री हेमचंद मांझी, पद्मश्री पंडीराम मंडावी और सुप्रसिद्ध लोक कलाकार बुटलू राम से भेंट कर उनका सम्मान किया। साथ ही टाइगर बॉय चेंदरू के परिवारजनों से भी मुलाकात की।

वन विभाग और पद्मश्री पंडीराम मंडावी के मार्गदर्शन में निर्मित यह घोटुल पूरी तरह इको-फ्रेंडली सामग्री—लकड़ी, मिट्टी और बांस—से तैयार किया गया है। मुख्यमंत्री ने घोटुल के खंभों पर की गई बारीक नक्काशी की मुक्तकंठ से प्रशंसा की, जिसे स्वयं पद्मश्री पंडीराम मंडावी ने उकेरा है। यह घोटुल सांस्कृतिक जुड़ाव, परंपरा और विरासत के संरक्षण का एक प्रभावी और प्रेरणादायी उदाहरण है।