भारत-फिनलैंड संबंधों को रणनीतिक साझेदारी का दर्जा, शांति और कूटनीति पर दोनों देशों का जोर
नई दिल्ली, 05 मार्च। पश्चिम एशिया और यूक्रेन में जारी संघर्षों के बीच भारत और फिनलैंड ने कानून के शासन, संवाद और कूटनीति के माध्यम से ही विवादों के समाधान की वकालत की है। दोनों देशों ने स्पष्ट कहा कि केवल सैन्य टकराव से किसी भी समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है और विश्व के विभिन्न क्षेत्रों में चल रहे संघर्षों की शीघ्र समाप्ति के लिए प्रयास किए जाने चाहिए।
भारत दौरे पर आए फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब के साथ गुरुवार को हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संयुक्त प्रेस वक्तव्य में कहा कि भारत और फिनलैंड ने अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी का दर्जा देने का निर्णय लिया है। इस अवसर पर दोनों देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए तीन समझौता ज्ञापनों पर भी हस्ताक्षर किए गए।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वर्तमान समय में विश्व के कई हिस्सों में अस्थिरता और अनिश्चितता का माहौल है। यूक्रेन से लेकर पश्चिम एशिया तक संघर्ष की स्थिति बनी हुई है। ऐसे समय में भारत और फिनलैंड जैसे लोकतांत्रिक देश कानून के शासन, बातचीत और कूटनीति में विश्वास रखते हैं और शांति स्थापना के हर प्रयास का समर्थन करते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत और यूरोप का बढ़ता सहयोग वैश्विक स्थिरता, विकास और साझा समृद्धि को नई मजबूती प्रदान कर रहा है। भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता व्यापार, निवेश और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग को और गति देगा।
प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे सहयोग का उल्लेख करते हुए कहा कि फिनलैंड की कंपनी नोकिया के मोबाइल फोन और दूरसंचार नेटवर्क ने करोड़ों भारतीयों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके अलावा फिनलैंड के वास्तुविदों के सहयोग से भारत ने चिनाब नदी पर विश्व का सबसे ऊंचा रेलवे पुल बनाया है। फिनलैंड की साझेदारी से असम के नुमालीगढ़ में दुनिया की सबसे बड़ी बांस आधारित जैव-एथेनॉल रिफाइनरी भी स्थापित की गई है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इन सफल सहयोगों से प्रेरित होकर दोनों देशों ने अपने संबंधों को डिजिटलाइजेशन और सतत विकास के क्षेत्रों में रणनीतिक साझेदारी के रूप में आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। यह साझेदारी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), 6जी दूरसंचार, स्वच्छ ऊर्जा, क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे हाई-टेक क्षेत्रों में सहयोग को नई गति देगी। साथ ही रक्षा, अंतरिक्ष, सेमीकंडक्टर और महत्वपूर्ण खनिज जैसे क्षेत्रों में भी साझेदारी को और गहरा किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि भारत और फिनलैंड जैसे जिम्मेदार लोकतांत्रिक देशों के बीच यह रणनीतिक सहयोग विश्व को विश्वसनीय प्रौद्योगिकी और मजबूत आपूर्ति श्रृंखला उपलब्ध कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि फिनलैंड भारतीय छात्रों और प्रतिभाओं के लिए एक प्रमुख गंतव्य बनता जा रहा है। दोनों देशों ने नवाचार और शोध सहयोग को बढ़ावा देने के लिए व्यापक ‘माइग्रेशन एंड मोबिलिटी एग्रीमेंट’ किया है, जिससे छात्रों, शोधकर्ताओं और पेशेवरों के बीच आवागमन को प्रोत्साहन मिलेगा।
शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत बनाने के लिए शिक्षक प्रशिक्षण, स्कूल-से-स्कूल साझेदारी और शिक्षा के भविष्य पर संयुक्त शोध को बढ़ावा देने पर भी सहमति बनी है। इसके साथ ही स्टार्टअप सहयोग और संयुक्त अनुसंधान कार्यक्रमों को भी आगे बढ़ाया जाएगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि स्वस्थ पृथ्वी दोनों देशों की साझा प्राथमिकता है। इसी दिशा में इस वर्ष भारत, फिनलैंड के सहयोग से ‘वर्ल्ड सर्कुलर इकॉनमी फोरम’ की मेजबानी करेगा, जिससे सतत विकास के प्रयासों को नई दिशा और नए विचार मिलेंगे।
दोनों देशों ने वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार की आवश्यकता पर भी जोर दिया और आतंकवाद के सभी रूपों को जड़ से समाप्त करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।




