होम छत्तीसगढ़ विधानसभा में साय ने महिला आरक्षण और परिसीमन पर विपक्ष को घेरा

विधानसभा में साय ने महिला आरक्षण और परिसीमन पर विपक्ष को घेरा

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रायपुर, 30 अप्रैल।छत्तीसगढ़ विधानसभा में मातृशक्ति से जुड़े महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नारी सम्मान, सशक्तिकरण और सांस्कृतिक मूल्यों को लेकर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती माता शबरी, मां दंतेश्वरी और मां महामाया की पावन भूमि है, जहां नारी को शक्ति स्वरूप माना जाता है। भारतीय परंपरा में महिला केवल सम्मान की पात्र नहीं, बल्कि सृजन और ऊर्जा का आधार है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि “या देवी सर्वभूतेषु मातृ-रूपेण संस्थिता…” जैसे श्लोक हमारी संस्कृति की मूल भावना को दर्शाते हैं। उन्होंने प्रदेश की गौरवशाली महिलाओं—भक्त माता कर्मा, तीजन बाई और उषा बारले—का उल्लेख करते हुए कहा कि इन विभूतियों ने छत्तीसगढ़ को वैश्विक पहचान दिलाई है। साथ ही रानी लक्ष्मीबाई, रानी दुर्गावती और अवंती बाई के बलिदान को याद करते हुए उन्होंने कहा कि देश इनका ऋणी है। आधुनिक दौर में कल्पना चावला और सुनीता विलियम्स जैसी महिलाओं ने भी भारत का मान बढ़ाया है।

    महिला आरक्षण और परिसीमन के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि समय पर परिसीमन नहीं होने से लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व सीमित रह गया। उन्होंने कहा कि बढ़ती जनसंख्या के बीच बड़े विधानसभा और लोकसभा क्षेत्र जनप्रतिनिधियों के लिए चुनौती बन गए हैं, जबकि परिसीमन से विकास और सहभागिता दोनों को गति मिलती।

    उन्होंने केंद्र सरकार के दृष्टिकोण का समर्थन करते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष राजनीतिक कारणों से महिला आरक्षण का विरोध करता रहा है और जनगणना व परिसीमन को बहाना बनाकर इस प्रक्रिया को बाधित कर रहा है।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीते वर्षों में महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण के लिए कई ऐतिहासिक पहल हुई हैं। स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण से महिलाओं की गरिमा बढ़ी है, वहीं उज्ज्वला योजना ने धुएं से मुक्ति दिलाई है। जनधन योजना के जरिए महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत किया गया है। इसके अलावा सुकन्या समृद्धि योजना, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना और ‘सखी वन स्टॉप सेंटर’ जैसी योजनाएं महिलाओं की सुरक्षा और भविष्य को सुदृढ़ बना रही हैं।

    प्रदेश सरकार की पहल का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि वर्ष 2026 को “महतारी गौरव वर्ष” के रूप में मनाया जा रहा है। महतारी वंदन योजना के तहत 69 लाख से अधिक महिलाओं को हर महीने आर्थिक सहायता दी जा रही है और अब तक 16 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि वितरित की जा चुकी है।

    उन्होंने कहा कि बस्तर जैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी अब बदलाव दिखाई दे रहा है और हजारों महिलाएं सरकारी योजनाओं का लाभ ले रही हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत महिलाओं को घरों में स्वामित्व दिया जा रहा है, जबकि जल जीवन मिशन से लाखों परिवारों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध हुआ है।

     मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में 8 लाख से अधिक महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं और सरकार का लक्ष्य इस संख्या को 10 लाख तक पहुंचाना है। नई औद्योगिक नीति में भी महिलाओं के लिए विशेष प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है।

    पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी को उल्लेखनीय बताते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश में 57 प्रतिशत प्रतिनिधित्व महिलाओं का है, जो एक मिसाल है। साथ ही उन्होंने 50 प्रतिशत आरक्षण के फैसले की सराहना की।

    श्री साय ने कहा कि महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण के लिए देश में नया अध्याय लिखने का प्रयास हो रहा है, लेकिन विपक्ष के रुख के कारण यह प्रक्रिया बाधित हो रही है। उन्होंने सभी से अपील की कि देश की आधी आबादी को उनका अधिकार दिलाने के इस प्रयास में सहयोग करें।