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एआई ज्ञान का विकल्प नहीं, बल्कि नए अवसरों का माध्यम : प्रो. आशुतोष सिंह

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भोपाल, 17 जुलाई।भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईआईटी) के निदेशक प्रो. आशुतोष कुमार सिंह ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) मानवीय ज्ञान, चेतना और विवेक का विकल्प नहीं बन सकती। उन्होंने कहा कि तकनीक समय के साथ बदलती रहती है, लेकिन ज्ञान हमेशा स्थायी रहता है और आज एआई जैसी उन्नत तकनीकें भी उसी ज्ञान के आधार पर विकसित और संचालित हो रही हैं।

      कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय (एमसीयू) में आयोजित 10 दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (एफडीपी) के समापन अवसर परमुख्य अतिथि प्रो. सिंह ने कहा कि एआई के क्षेत्र में प्रशिक्षित लोगों के लिए भविष्य में सबसे अधिक अवसर उपलब्ध होंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई रोजगार छीनने वाली तकनीक नहीं, बल्कि नए रोजगार और संभावनाओं का सृजन करने वाली शक्ति है। इसलिए लोगों को इससे भयभीत होने के बजाय इसे सीखकर अपने कौशल को विकसित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि एआई के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाने में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका है।

      एमसीयू के कुलपति विजय मनोहर तिवारी ने कहा कि मीडिया के न्यूजरूम तेजी से बदल रहे हैं और वहां उपयोग होने वाले टूल्स एवं तकनीकें बेहद कम समय में अपडेट हो रही हैं। उन्होंने बताया कि इसी बदलाव को देखते हुए विश्वविद्यालय ने अपने पाठ्यक्रम में एआई को शामिल किया है, ताकि विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक ज्ञान मिल सके। उन्होंने कहा कि शिक्षकों के लिए आयोजित यह 10 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम इसी दिशा में पहला महत्वपूर्ण कदम है और इसका सीधा लाभ छात्रों को मिलेगा। विश्वविद्यालय भविष्य में भी एआई के क्षेत्र में होने वाले बदलावों के अनुरूप अपने पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण प्रणाली को लगातार अद्यतन करता रहेगा।

     तकनीक एवं भाषा प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ बालेंदु शर्मा दाधीच ने कहा कि भारत में एआई महाशक्ति बनने की पूरी क्षमता है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार एआई को बढ़ावा दे रही है और दुनिया की अग्रणी टेक कंपनियां भारत में निवेश कर रही हैं। उन्होंने भारत की मजबूत डिजिटल आधारभूत संरचना, विशाल टैलेंट पूल और लोकतांत्रिक मूल्यों को एआई विकास के लिए बड़ी ताकत बताया। दाधीच ने कहा कि एआई किसी जैविक शक्ति से नहीं, बल्कि एल्गोरिद्म की क्षमता से संचालित होती है। उन्होंने अमेरिका, चीन और भारत में एआई के विकास की तुलना करते हुए भारत में स्टार्टअप इकोसिस्टम और एआई की संभावनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।

    कार्यक्रम के तकनीकी सत्र में वरिष्ठ पत्रकार एवं एआई ट्रेनर देविका छिब्बर ने प्रतिभागियों को गूगल एंटीग्रेविटी और आर्बिटर जैसे टूल्स की मदद से प्रोफेशनल वेबसाइट डिजाइन करने तथा डीपफेक की पहचान करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। उन्होंने कहा कि मीडिया संस्थानों के न्यूजरूम में एआई का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, इसलिए पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए एआई और एजेंटिक एआई का प्रशिक्षण आवश्यक हो गया है। उन्होंने फैक्ट-चेकिंग प्लेटफॉर्म, एआई नीति और गवर्नेंस से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर भी विस्तार से चर्चा की।

    समापन समारोह के दौरान विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. प्रदीप डहेरिया द्वारा लिखित पुस्तक ‘जनमाध्यम, युवा और मीडिया साक्षरता’ का विमोचन भी अतिथियों ने किया। एफडीपी के विभिन्न सत्रों की विस्तृत रिपोर्ट प्रो. सी.पी. अग्रवाल ने प्रस्तुत की। कार्यक्रम का संचालन एफडीपी के समन्वयक एवं विज्ञापन एवं जनसंपर्क विभागाध्यक्ष डॉ. पवित्र श्रीवास्तव ने किया, जबकि कुलसचिव डॉ. पी. शशिकला ने सभी अतिथियों और विशेषज्ञों के प्रति आभार व्यक्त किया।