रायपुर, 9 अगस्त। पूर्व मंत्री मोहम्मद अकबर ने बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के सिमगा तहसील अंतर्गत ग्राम चंदेरी में चरागाह की जमीन को औद्योगिक प्रयोजन के लिए दिए जाने को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के आश्वासन और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद करीब 59 एकड़ चरागाह भूमि उद्योग विभाग को सौंप दी गई है।
श्री अकबर ने आज यहां जारी बयान में कहा कि 23 फरवरी 24 को दामाखेड़ा में कबीरपंथ के कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने दामाखेड़ा के 10 किलोमीटर के दायरे में उद्योग नहीं लगाए जाने का आश्वासन दिया था। इसके बावजूद चंदेरी में लगभग 23.93 हेक्टेयर (करीब 59 एकड़) चरागाह भूमि को नवीन औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना के लिए उद्योग विभाग के आधिपत्य में दे दिया गया।
पूर्व मंत्री ने कहा कि यह मामला राजस्व मंत्री के गृह जिले से जुड़ा है, लेकिन सरकार गांव के आम निस्तार और चरागाह की जमीन को बचाने में असहाय नजर आ रही है। उन्होंने छत्तीसगढ़ शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के 10 मार्च 2011 के निर्देश का हवाला देते हुए कहा कि सार्वजनिक उपयोग के लिए सुरक्षित भूमि को अन्य प्रयोजन के लिए आवंटित नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि चंदेरी तहसील के खसरा नंबर 1660, 2206, 2207 और 1743 की कुल करीब 23.93 हेक्टेयर भूमि 6 फरवरी 2026 को उद्योग विभाग को आधिपत्य में दे दी गई। अकबर के अनुसार, नायब तहसीलदार सिमगा की 19 जनवरी 2025 की आदेश पत्रिका में ग्राम पंचायत चंदेरी की आपत्ति का उल्लेख भी किया गया था। इसके बावजूद तहसीलदार सिमगा के माध्यम से जमीन का आधिपत्य उद्योग केंद्र बलौदाबाजार को सौंप दिया गया।
अकबर ने दावा किया कि ग्राम पंचायत चंदेरी की 20 दिसंबर 25 की बैठक में उक्त भूमि को उद्योग के लिए हस्तांतरित नहीं करने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया था। इसके बाद 30 जुलाई 26 को ग्राम सभा ने भी सर्वसम्मति से चरागाह भूमि को औद्योगिक प्रयोजन के लिए दिए जाने का विरोध किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि ग्राम सभा के विरोध के बावजूद भुइयां पोर्टल पर संबंधित खसरों की भूमि संचालक उद्योग के नाम पर दर्ज कर दी गई है। अकबर के मुताबिक यह जमीन आसपास की करीब 8 से 10 ग्राम पंचायतों के गोवंश और अन्य मवेशियों के लिए प्रमुख प्राकृतिक चरागाह है। ग्राम के निस्तार पत्रक में भी भूमि को चरागाह के रूप में दर्ज किया गया है।




