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स्टील कचरे से बनी दुनिया की सबसे लंबी सड़क, गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज

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रायगढ़/नई दिल्ली, 12 सितम्बर। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में जिंदल स्टील लिमिटेड ने स्टील उद्योग से निकलने वाले कचरे को उपयोगी संसाधन में बदलकर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। कंपनी ने वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों के सहयोग से करीब 1.85 किलोमीटर लंबी और चार लेन वाली सड़क का निर्माण किया है, जिसमें 100 प्रतिशत प्रोसेस्ड स्टील स्लैग का इस्तेमाल किया गया है। कंपनी के अनुसार, यह दुनिया की सबसे लंबी ऐसी सड़क है, जिसे गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में शामिल किया गया है।

     इस ऐतिहासिक सड़क का शनिवार को नई दिल्ली में आयोजित समारोह में केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और जिंदल स्टील लिमिटेड के चेयरमैन नवीन जिंदल ने ऑनलाइन उद्घाटन किया। रायगढ़ स्थित कंपनी के अधिकारी और कर्मचारी भी ऑनलाइन माध्यम से समारोह से जुड़े।

करीब दो लाख टन स्टील स्लैग का इस्तेमाल

     ‘वेस्ट टू वेल्थ’ यानी कचरे से संपदा की अवधारणा को साकार करने वाली इस परियोजना में लगभग 2 लाख टन प्रोसेस्ड स्टील स्लैग का इस्तेमाल किया गया है। इससे सड़क निर्माण के लिए प्राकृतिक पत्थरों की खुदाई और खनन पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। परियोजना को पर्यावरण संरक्षण और औद्योगिक कचरे के बेहतर उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

      इस सड़क को केवल प्रयोगात्मक परियोजना के रूप में नहीं, बल्कि भारी वाणिज्यिक वाहनों की आवाजाही को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। सड़क की मजबूती और टिकाऊपन को सुनिश्चित करने के लिए निर्धारित तकनीकी एवं पर्यावरणीय मानकों का पालन किया गया है।

     कंपनी के अनुसार, पारंपरिक सड़क निर्माण की तुलना में यह सड़क करीब 35 प्रतिशत पतली है, जबकि इसके निर्माण में लगभग 40 प्रतिशत लागत की बचत हुई है। इससे निर्माण सामग्री, प्राकृतिक संसाधनों और लागत—तीनों की बचत का रास्ता खुलता है।

वैज्ञानिक प्रक्रिया से स्लैग बना सड़क निर्माण सामग्री

       जिंदल स्टील ने सीएसआईआर और सड़क अनुसंधान संस्थान के सहयोग से स्टील स्लैग को सड़क निर्माण के लिए उपयोगी सामग्री में परिवर्तित किया। इसके लिए स्लैग की क्रशिंग, उसमें मौजूद धातु को अलग करने और उसकी ग्रेडिंग जैसी वैज्ञानिक प्रक्रियाएं अपनाई गईं। इसके बाद तैयार सामग्री का इस्तेमाल सड़क की निचली परत से लेकर ऊपरी बिटुमिन परत तक किया गया।

       कंपनी ने इस प्रोसेस्ड स्लैग को ‘स्टील ग्रिट’ नाम दिया है। परियोजना के उद्घाटन समारोह में ‘स्टील ग्रिट’ के लोगो का भी लोकार्पण किया गया। कंपनी का कहना है कि सड़क निर्माण में इसके व्यापक इस्तेमाल से देश में स्टील स्लैग के वैज्ञानिक और पर्यावरण अनुकूल उपयोग को बढ़ावा मिल सकता है।

       परियोजना को लागू करने से पहले इसके पर्यावरणीय और तकनीकी पहलुओं की जांच की गई। देश के कई प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने परियोजना स्थल का लगातार दौरा कर निर्माण कार्य का निरीक्षण किया तथा आवश्यक तकनीकी सुझाव दिए। हाल ही में गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की टीम ने भी रायगढ़ पहुंचकर सड़क का स्थल निरीक्षण किया था।

देशभर में इस्तेमाल की तैयारी

        स्टील स्लैग से सड़क निर्माण की इस तकनीक को देश के अन्य हिस्सों में भी इस्तेमाल करने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है। इसके लिए संबंधित पक्षों के बीच एक समझौते पर भी हस्ताक्षर किए गए हैं। इसका उद्देश्य इस तकनीक को व्यापक स्तर पर अपनाकर सड़क निर्माण में प्राकृतिक खनिज संसाधनों पर निर्भरता कम करना और औद्योगिक अपशिष्ट के उपयोग को बढ़ावा देना है।

       यह सड़क जिंदल सीमेंट परियोजना स्थल को राष्ट्रीय राजमार्ग-49 से सीधे जोड़ने के उद्देश्य से बनाई गई है। ऐसे में परियोजना का औद्योगिक उपयोग के साथ-साथ तकनीकी प्रदर्शन के लिहाज से भी विशेष महत्व है।

‘कचरा देश निर्माण का जरिया बन सकता है’

      जिंदल स्टील लिमिटेड के चेयरमैन नवीन जिंदल ने कहा कि भारत की प्रगति ऐसे नवाचारों के माध्यम से होनी चाहिए, जो पर्यावरण की रक्षा के साथ देश के विकास में भी योगदान दें। उन्होंने कहा कि यह तकनीक इस बात का उदाहरण है कि उद्योगों से निकलने वाले कचरे को देश निर्माण के उपयोगी संसाधन में बदला जा सकता है।

     केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने परियोजना को ‘वेस्ट टू वेल्थ’ के सपने को साकार करने वाला महत्वपूर्ण उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि यह परियोजना दर्शाती है कि स्वदेशी तकनीक और वैज्ञानिक क्षमता के माध्यम से देश की बड़ी चुनौतियों के व्यावहारिक समाधान विकसित किए जा सकते हैं।

     रायगढ़ में निर्मित यह सड़क इस मायने में महत्वपूर्ण है कि इसमें औद्योगिक अपशिष्ट को न केवल पुनर्चक्रित किया गया है, बल्कि उसे उच्च गुणवत्ता वाले सड़क निर्माण में उपयोगी संसाधन में बदलकर वास्तविक बुनियादी ढांचे का हिस्सा बनाया गया है।

     जिंदल स्टील की यह परियोजना औद्योगिक कचरे के पुनर्चक्रण, टिकाऊ बुनियादी ढांचे और संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल की दिशा में एक ऐसा प्रयोग है, जिसकी सफलता देश में भविष्य के सड़क निर्माण के लिए नई संभावनाएं खोल सकती है।