रायपुर, 12 सितंबर। हसदेव-अरण्य के तारा कोल ब्लॉक को लेकर उठ रहे सवालों और आरोपों के बीच छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल तारा कोल ब्लॉक की केवल प्रतिस्पर्धात्मक नीलामी हुई है। नीलामी में सफल बोलीदाता को खनन की तत्काल अनुमति नहीं मिली है। खनन शुरू करने से पहले माइनिंग प्लान, खनन पट्टा, पर्यावरण स्वीकृति, वन स्वीकृति समेत सभी जरूरी वैधानिक प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी।
निगम के अनुसार तारा कोल ब्लॉक की प्रतिस्पर्धात्मक नीलामी में कुल नौ बोलियां प्राप्त हुई थीं। प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह ब्लॉक सीजी सिन एंड गैस एंड केमिकल्स लिमिटेड (CG Syn&Gas and Chemicals Limited) को मिला है। हालांकि नीलामी में सफल होना अपने आप में खनन की अनुमति नहीं माना जाएगा। वास्तविक खनन गतिविधियां तभी शुरू हो सकेंगी, जब संबंधित सभी वैधानिक और पर्यावरणीय अनुमतियां हासिल हो जाएंगी।
सरकार की ओर से कहा गया है कि खनन से पहले वन स्वीकृति की निर्धारित प्रक्रिया से गुजरना होगा। इसके साथ ही पर्यावरणीय प्रभावों का निर्धारित मानकों के अनुसार आकलन किया जाएगा। जरूरी अनुमतियां मिलने से पहले न तो वृक्षों की कटाई की जा सकती है और न ही वास्तविक खनन शुरू किया जा सकता है। इस तरह नीलामी, वन एवं पर्यावरण स्वीकृति और खनन की अनुमति को अलग-अलग चरणों में देखा जाना चाहिए।
तारा का पुराना आवंटन सुप्रीम कोर्ट के आदेश से हुआ था निरस्त
निगम ने तारा कोल ब्लॉक के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा है कि इसका मामला नया नहीं है। तारा कोल ब्लॉक वर्ष 2011 में छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम को आवंटित किया गया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के परिणामस्वरूप अन्य कोल ब्लॉकों के साथ इसका पूर्व आवंटन भी निरस्त हो गया था।
सरकार का तर्क है कि हसदेव-अरण्य क्षेत्र में कोयला संसाधनों के उपयोग और विभिन्न कोल ब्लॉकों से संबंधित प्रक्रियाएं अलग-अलग समय से चली आ रही हैं। क्षेत्र के कुछ कोल ब्लॉक सरकारी विद्युत उत्पादन संस्थाओं की जरूरतों से जुड़े रहे हैं। इनमें परसा ईस्ट केते बासन (पीईकेबी) को राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड की विद्युत उत्पादन जरूरतों से संबंधित प्रमुख ब्लॉक के रूप में बताया गया है।
वन और पर्यावरण मंजूरी की पुरानी प्रक्रियाओं का भी हवाला
तारा और पीईकेबी से जुड़े वन एवं पर्यावरणीय स्वीकृति के इतिहास का हवाला देते हुए निगम ने कहा है कि इन प्रक्रियाओं की शुरुआत पूर्ववर्ती केंद्र सरकार के कार्यकाल में हुई थी। दस्तावेज के अनुसार वर्ष 2011 में वन सलाहकार समिति की प्रतिकूल अनुशंसा के बावजूद केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के स्तर पर तारा और पीईकेबी से संबंधित वन स्वीकृति का निर्णय लिया गया था।
पीईकेबी को जुलाई 2011 में स्टेज-1 और मार्च 2012 में स्टेज-2 फारेस्ट क्लियरेंस मिलने का उल्लेख भी किया गया है। इसी अवधि में परियोजना से संबंधित पर्यावरणीय स्वीकृति की प्रक्रिया भी आगे बढ़ी थी।
सरकार का कहना है कि वर्तमान में वाणिज्यिक कोयला खनन के लिए प्रतिस्पर्धात्मक नीलामी की व्यवस्था लागू है। पहले कोल ब्लॉकों का आवंटन सरकारी कंपनियों अथवा निर्धारित उपयोगकर्ता संस्थाओं को किया जाता था। तारा ब्लॉक की मौजूदा प्रक्रिया इसी प्रतिस्पर्धात्मक नीलामी व्यवस्था के तहत हुई है।
पूर्ववर्ती सरकार के पत्राचार का भी उल्लेख
तारा कोल ब्लॉक को लेकर उठ रहे राजनीतिक विवाद के बीच सरकार ने यह भी कहा है कि हसदेव क्षेत्र में कोयला उत्पादन और बिजली आपूर्ति की जरूरतों को लेकर पूर्ववर्ती राज्य सरकार के कार्यकाल में भी केंद्र सरकार से पत्राचार किया गया था।
दस्तावेज के अनुसार वर्ष 2019 और 2021 में कोल ब्लॉकों के आवंटन को लेकर केंद्र सरकार से पत्राचार हुआ था। वर्ष 2022 में छत्तीसगढ़ विधानसभा ने हसदेव क्षेत्र के कोल ब्लॉकों को लेकर एक अशासकीय संकल्प भी पारित किया था।
निगम ने यह भी स्पष्ट करने की कोशिश की है कि हसदेव-अरण्य में कोयला संसाधनों के उपयोग का मुद्दा केवल तारा ब्लॉक तक सीमित नहीं है। मोरगा कोल ब्लॉक के आवंटन का विषय भी इससे जुड़ा रहा है। पूर्ववर्ती राज्य सरकार ने मोरगा कोल ब्लॉक को छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के पक्ष में आवंटित करने के लिए केंद्रीय कोयला मंत्रालय से अनुरोध किया था।
राज्य सरकार के उस पत्र में मोरगा से लगे मदनपुर कोल ब्लॉक के मदनपुर साउथ ब्लॉक का उल्लेख करते हुए कहा गया था कि इसे केंद्रीय कोयला मंत्रालय पहले ही आंध्र प्रदेश मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन को आवंटित कर चुका है। इसी आधार पर मोरगा कोल ब्लॉक को छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम को आवंटित करने का अनुरोध किया गया था। पत्र में आवंटन के बाद आवश्यक पर्यावरणीय अनुमतियों के लिए केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से अनुरोध किए जाने की बात भी कही गई थी।
वैज्ञानिक अध्ययन और पर्यावरणीय सुरक्षा का दावा
हसदेव-अरण्य में संभावित खनन को लेकर भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद के वैज्ञानिक अध्ययन का भी हवाला दिया गया है। अध्ययन में क्षेत्र की जैव विविधता, वन्यजीव, जलग्रहण क्षेत्र और पर्यावरणीय संवेदनशीलता का आकलन किए जाने की बात कही गई है।
दस्तावेज के अनुसार अध्ययन में तारा सहित कुछ अन्य कोल ब्लॉकों को कड़े पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों और संरक्षण प्रावधानों के साथ खनन के लिए विचार योग्य माना गया था। सरकार का कहना है कि किसी भी खनन परियोजना में पर्यावरण एवं वन स्वीकृति के साथ वैज्ञानिक अध्ययन, प्रतिपूरक वनीकरण तथा निर्धारित पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा।
वन क्षेत्र बढ़ने के आंकड़ों का भी हवाला
वन संरक्षण को राज्य की प्राथमिकता बताते हुए दस्तावेज में फारेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट-2023 के आंकड़ों का उल्लेख किया गया है। इसके अनुसार वर्ष 2021 से 2023 के बीच छत्तीसगढ़ के वन क्षेत्राच्छादन में 683.62 वर्ग किलोमीटर की शुद्ध वृद्धि दर्ज की गई, जो देश के सभी राज्यों में सर्वाधिक बताई गई है। इसी अवधि में राज्य के वनावरण में 702.75 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि का भी उल्लेख है।
फारेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की वर्ष 2021 की रिपोर्ट के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया है कि वर्ष 2019 की तुलना में छत्तीसगढ़ के वनावरण में करीब 106 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि हुई थी।
नीलामी का अर्थ खनन की तत्काल अनुमति नहीं
तारा कोल ब्लॉक को लेकर सरकार की मौजूदा सफाई का मुख्य आधार यही है कि अभी केवल प्रतिस्पर्धात्मक नीलामी पूरी हुई है। सफल बोलीदाता को खनन शुरू करने से पहले सभी जरूरी वैधानिक अनुमतियां हासिल करनी होंगी। इनमें माइनिंग प्लान, खनन पट्टा, वन स्वीकृति, पर्यावरण स्वीकृति और अन्य आवश्यक मंजूरियां शामिल हैं।
इस लिहाज से सरकार ने नीलामी को खनन की अंतिम अनुमति से अलग चरण बताया है। उसका कहना है कि सभी निर्धारित प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही वास्तविक खनन गतिविधियों की अनुमति मिल सकेगी।
सरकार ने यह भी कहा है कि हसदेव-अरण्य में कोयला संसाधनों के उपयोग के मामले में ऊर्जा सुरक्षा और विकास की जरूरतों के साथ वन एवं पर्यावरण संरक्षण तथा स्थानीय हितों के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। तारा कोल ब्लॉक को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब आगे की प्रक्रिया में वन, पर्यावरण और अन्य वैधानिक मंजूरियां निर्णायक होंगी।




