राजनांदगांव, 7 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ के ग्राम सुरगी में 27 वर्षों से साहित्यिक गतिविधियों को निरंतर आगे बढ़ा रही साकेत साहित्य परिषद का 27वां वार्षिक समारोह ग्राम मोखला में आयोजित किया गया। तीन सत्रों में हुए समारोह में प्रदेश के विभिन्न जिलों से साहित्यकारों और साहित्यप्रेमियों ने सहभागिता की। परिचर्चा, प्रतिभा सम्मान और कवि सम्मेलन समारोह के प्रमुख आकर्षण रहे।
पहले सत्र में ‘इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की चुनौतियां और छत्तीसगढ़ी भाषा’ विषय पर परिचर्चा हुई। मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्रा ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में 27 वर्षों से साहित्यिक संस्था का निरंतर संचालन साहित्यकारों के सामूहिक प्रयास और समर्पण का परिणाम है। उन्होंने परिषद के साहित्यिक आयोजनों के माध्यम से समाज में जनजागरण और युवा पीढ़ी को साहित्य एवं संस्कृति से जोड़ने के प्रयासों की सराहना की। सत्र की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार बलदाऊ राम साहू ने की। वरिष्ठ साहित्यकार संजीव तिवारी और राजभाषा आयोग के राजनांदगांव जिला समन्वयक आत्माराम कोशा अमात्य विशिष्ट अतिथि रहे।
परिचर्चा में वक्ताओं ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया ने साहित्य के सामने नई चुनौतियां खड़ी की हैं, लेकिन इसके जरिए साहित्य और भाषाओं के प्रचार-प्रसार की संभावनाएं भी बढ़ी हैं। वक्ताओं ने कहा कि सोशल मीडिया और एआई के बढ़ते इस्तेमाल के बीच छत्तीसगढ़ी भाषा भी तकनीक के साथ कदमताल कर रही है।
दूसरे सत्र में प्रतिभाओं का सम्मान किया गया। मुख्य अतिथि जिला सहकारी केंद्रीय बैंक राजनांदगांव के अध्यक्ष सचिन सिंह बघेल ने साहित्य और कला के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली प्रतिभाओं को सम्मानित किया। भाषाविज्ञानी डॉ. विनोद वर्मा को छत्तीसगढ़ी भाषा में योगदान के लिए साकेत साहित्य सम्मान, बांसगीत वादन के लिए विक्रम यादव और लोक संगीत में योगदान के लिए गोविंद साव को साकेत कला साधना सम्मान तथा वरिष्ठ गीतकार-कवि आनंद राम सार्वा को साकेत सृजन सम्मान प्रदान किया गया। व्यंग्य लेखक गिरीश ठक्कर को भी सम्मानित किया गया। सम्मानित प्रतिभाओं को शॉल, श्रीफल, प्रतीक चिन्ह और पेन भेंट किए गए।
समारोह की अध्यक्षता जितेन्द्र मुदलियार ने की। इस अवसर पर जनप्रतिनिधियों, साहित्यकारों, समाजसेवियों और बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमियों की उपस्थिति रही। वक्ताओं ने साकेत साहित्य परिषद के 27 वर्षों के निरंतर साहित्यिक योगदान को राजनांदगांव की समृद्ध साहित्यिक परंपरा के लिए महत्वपूर्ण बताया।
समारोह के अंतिम सत्र में भव्य कवि सम्मेलन आयोजित हुआ। मुख्य अतिथि सुप्रसिद्ध कवि पद्मलोचन शर्मा ‘मुँहफट’ और अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. अशोक आकाश ने की। प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे कवियों ने अपनी रचनाओं का पाठ कर श्रोताओं को देर तक बांधे रखा।




