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ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक नहीं रुकेंगे: हिरासत से रिहा होने के बाद राहुल गांधी का ऐलान

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नई दिल्ली, 7 अक्टूबर। मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में लगातार दूसरे दिन विपक्षी सांसदों के प्रदर्शन के बीच हिरासत में लिए गए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को दिल्ली पुलिस ने रिहा कर दिया है। राहुल गांधी को करीब दो घंटे तक बाराखंभा रोड थाने में रखा गया। इसके बाद उन्हें रिहा कर दिया गया।

       राहुल गांधी ने हिरासत में लिए जाने से पहले केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग के खिलाफ अपना विरोध जारी रखने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक आंदोलन नहीं रुकेगा। ‘एक्स’ पर जारी अपने संदेश में राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ऐसा कोई कदम नहीं उठा सकते, जिससे उनका विरोध रोका जा सके।

       श्री गांधी ने कहा कि यह लड़ाई संविधान और जनता के मताधिकार की रक्षा से जुड़ी है। उन्होंने अपने एक वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार का नाम लेते हुए कहा कि इन सभी को न्याय के कटघरे में लाया जाएगा। उनके मुताबिक विपक्षी नेताओं को जंतर-मंतर तक जाने से रोकना सरकार की घबराहट को दर्शाता है। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि उनके खिलाफ कितने भी मामले दर्ज किए जाएं, वे अपने आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे।

       दरअसल, बुधवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा विपक्षी सांसदों के साथ बैठक के बाद इंडिया गठबंधन के कई सांसद जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए बसों से रवाना हुए थे। विपक्षी सांसदों की मांग मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की थी। पुलिस ने जंतर-मंतर पहुंचने से पहले ही बसों को रोक दिया। इसके बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य विपक्षी सांसद बसों से उतरकर सड़क पर बैठ गए और धरना शुरू कर दिया।

       पुलिस द्वारा रास्ता रोके जाने के बाद मौके पर काफी देर तक गतिरोध बना रहा। इसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाना शुरू किया। राहुल गांधी और अन्य नेताओं को पुलिसकर्मियों ने हिरासत में लेकर अलग-अलग स्थानों पर पहुंचाया। राहुल गांधी को बाराखंभा रोड थाने ले जाया गया, जबकि प्रियंका गांधी वाड्रा और कुछ अन्य नेताओं को छत्रसाल स्टेडियम ले जाया गया। बाद में दोनों को रिहा कर दिया गया।

       प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी को पुलिस द्वारा बस तक ले जाने की तस्वीरें और वीडियो सामने आए। इसी दौरान प्रियंका गांधी वाड्रा अन्य महिला नेताओं के साथ सड़क पर बैठ गईं। उनके हाथ में संविधान की प्रति भी दिखाई दी। महिला पुलिसकर्मियों ने उन्हें और अन्य महिला प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाया।

        विपक्षी दलों का आरोप है कि चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर उठाए जा रहे सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं दिया जा रहा है। विपक्ष इसी मुद्दे को लेकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहा है। दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची से संबंधित प्रक्रिया में उठाए गए सवालों पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है और कहा है कि बहु-सदस्यीय आयोग में मतभेद होना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है तथा अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए।

        दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए पूर्व अनुमति की आवश्यकता और निर्धारित नियमों का हवाला दिया है। पुलिस के अनुसार, जंतर-मंतर पर सभा के लिए पहले से अनुमति लेना आवश्यक है और प्रदर्शनकारियों की संख्या को लेकर भी निर्धारित सीमा है।

        यह घटनाक्रम मंगलवार को हुए विरोध प्रदर्शन के एक दिन बाद सामने आया है। मंगलवार को भी राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं को निर्वाचन आयोग की ओर मार्च करने से रोका गया था। इसके बाद विपक्षी नेताओं ने आकाशवाणी भवन परिसर में धरना दिया था और देर शाम उन्हें हिरासत में लिया गया था।

         लगातार दूसरे दिन राहुल गांधी और अन्य विपक्षी सांसदों की हिरासत के बाद चुनाव आयोग, मतदाता सूची में संशोधन और विपक्ष की ओर से लगाए जा रहे ‘वोट चोरी’ के आरोपों को लेकर राजनीतिक टकराव और तेज हो गया है। विपक्ष ने स्पष्ट किया है कि वह इस मुद्दे पर अपना आंदोलन जारी रखेगा, जबकि निर्वाचन आयोग और सत्तारूढ़ पक्ष विपक्ष के आरोपों को स्वीकार नहीं करते हैं।