रायपुर, 30 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले की अहिवारा विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के विधायक राजमहंत डोमन लाल कोर्सेवाड़ा का निधन हो गया है। वे 73 वर्ष के थे।
पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के चलते हैदराबाद में उनका उपचार चल रहा था। उनके निधन की खबर से अहिवारा विधानसभा क्षेत्र सहित पूरे प्रदेश के राजनीतिक और सामाजिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। भाजपा नेताओं, कार्यकर्ताओं और उनके समर्थकों ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है।
डोमन लाल कोर्सेवाड़ा अहिवारा विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं में शामिल थे। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में दो बार इस क्षेत्र का विधानसभा में प्रतिनिधित्व किया। वर्ष 2008 में उन्होंने पहली बार भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़कर जीत दर्ज की थी। इसके बाद वर्ष 2023 में पार्टी ने एक बार फिर उन पर भरोसा जताया और वे दूसरी बार विधायक निर्वाचित हुए।
राजनीति में आने से पहले कोर्सेवाड़ा शिक्षा और शासकीय सेवा से जुड़े रहे। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा और धीरे-धीरे क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई। राजनीतिक गतिविधियों के साथ सामाजिक क्षेत्र में भी उनकी सक्रियता रही। क्षेत्र की राजनीति में लंबे समय तक उनका प्रभाव और जनसंपर्क बना रहा।
राजमहंत डोमन लाल कोर्सेवाड़ा का जन्म 12 अगस्त 1948 को बालोद जिले के गुण्डरदेही विकासखंड के ग्राम भेंडरा में हुआ था। उनके पिता का नाम स्वर्गीय नम्मू दास कोर्सेवाड़ा था। उन्होंने पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर से राजनीति शास्त्र में स्नातकोत्तर (एमए) की शिक्षा प्राप्त की। इसके साथ ही उन्होंने बीएड की डिग्री भी हासिल की थी।
शिक्षा प्राप्त करने के बाद वे शासकीय सेवा से जुड़े और सेवानिवृत्ति तक अपनी सेवाएं दीं। सरकारी सेवा से निवृत्त होने के बाद उन्होंने राजनीति को अपने सार्वजनिक जीवन का माध्यम बनाया। उनका विवाह 4 मई 1970 को कमला कोर्सेवाड़ा के साथ हुआ था। उनके परिवार में एक पुत्र और दो पुत्रियां हैं।
डोमन लाल कोर्सेवाड़ा ने वर्ष 2008 में पहली बार अहिवारा विधानसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा और जीत हासिल कर विधानसभा पहुंचे। इसके बाद वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें दोबारा उम्मीदवार बनाया। पार्टी के भरोसे पर खरे उतरते हुए उन्होंने फिर जीत दर्ज की और दूसरी बार विधायक बने।
उनकी राजनीतिक वरिष्ठता और अनुभव को देखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने नवंबर 2025 में उन्हें अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण का उपाध्यक्ष नियुक्त किया था। इस पद पर उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा भी प्रदान किया गया था।




