MainSlideछत्तीसगढ़

मानवाधिकार संरक्षण और आर्थिक सामाजिक योजनाओं के क्रियान्वयन में गहरा संबंध –दत्तू

रायपुर 13 फरवरी। राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति एच.एल. दत्तू ने कहा कि मानवाधिकार संरक्षण और आर्थिक सामाजिक योजनाओं के क्रियान्वयन में गहरा संबंध है।

श्री दत्तू ने आज यहां राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग, नई दिल्ली द्वारा अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग की शिकायतों के निराकरण के संबंध में कैम्प सीटिंग एवं जन सुनवाई कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए कहा कि मानवा अधिकार संरक्षण और आर्थिक सामाजिक योजनाओं के क्रियान्वयन में गहरा संबंध है। उन्होंने कहा कि मानव अधिकारों के संरक्षण के लिए बुनियादी सुविधाओं के लिए ठोस कार्य धरातल पर दिखे। महिलाओं और बालिकाओं को सेनिटेशन की सुविधा उपलब्ध हो।महिलाओं और बालिकाओं की ट्रेकिंग की घटनाओं पर तत्काल और ठोस कार्यवाही की जाए।

उन्होने कहा कि मानव अधिकारों का हनन नहीं हो इसके लिए अनुसूचित जाति एवं जनजाति अधिनियम के तहत सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि इस खुली सुनवाई का उद्देश्य पीड़ित और राज्य सरकार के अधिकारियों को एक मंच पर लाकर मानव अधिकार हनन के प्रकरणों का त्वरित निदान करना है। आयोजन से ऐसा वातावरण निर्मित हो, जिससे सभी नागरिकों के मूलभूत अधिकारों का संरक्षण हो और वे संविधान में प्रदत्त मानव अधिकारों का उपभोग कर सके।

न्यायमूर्ति श्री दत्तू ने मानव अधिकारों के संरक्षण के लिए बुनियादी सुविधाओं-शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पानी, स्वच्छता के विकास पर विशेष जोर दिया। श्री दत्तू ने कहा कि आयोग का उद्देश्य मानव अधिकार के प्रकरणों की सुनवाई कर न्याय दिलाना है। आम लोगों को उनके मूलभूत अधिकार मिले, स्कूल ठीक से संचालित हो, आंगनबाड़ी प्रभावी ढंग से कार्य करें, लोगों को स्वास्थ्य की सुविधा मुहैया हो। आयोग राज्य में विशेषकर अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति के प्रकरणों की सुनवाई करेगा।

उन्होंने बताया कि कैम्प सीटिंग के माध्यम से प्रभावितों को क्षतिपूर्ति राशि दिलाई जाती है और दोषियों के खिलाफ कार्यवाही की अनुशंसा भी की जाती है। शिविरों के माध्यम से मानव अधिकार एक्ट 1993 के तहत मानव अधिकार हनन के प्रकरणों को सुनने और निराकृत करने का अवसर मिलता है।

इस अवसर पर आयोग के महासचिव जयदीप गोविंद ने मानव अधिकार से संबंधित प्रकरणों के निराकरण और पीड़ित पक्षों को क्षति पूर्ति राशि वितरित करने की जानकारी दी। उन्होंने बताया राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग मानव अधिकार के उल्लंघन के संबंध में सुनवाई कर प्रभावितों को न्याय दिलाने का कार्य करता है। आयोग द्वारा प्राप्त शिकायतों की शत्प्रतिशत सुनवाई की जाती है और इसका पालन भी किया जाता है।

प्रभारी मुख्य सचिव अमिताभ जैन ने कहा कि छत्तीसगढ़ में पहली बार राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग की फुल बेंच एवं सिंगल बेंच द्वारा एक साथ अनुसूचित जाति एवं जनजाति से संबंधित शिकायतों की खुली जनसुनवाई की जा रही है। इसका लाभ पीड़ित पक्षों को मिलेगा। उन्होंने कहा कि इन वर्गों से संबंधित प्रत्येक प्रकरणों को आयोग के समक्ष रखने और उनके निराकरण के लिए छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद पहली बार यह अवसर मिला है।

Related Articles

Back to top button